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संतकबीरनगर के एसपी द्वारा महिला अपराधों की विवेचना में लापरवाही पर दो उपनिरीक्षकों के खिलाफ जांच बिठाने और “लापरवाही बर्दाश्त नहीं” करने के सख्त दावों के बीच जमीनी स्तर पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। महुली थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 328/2025 और अर्चना प्रजापति व एक महिला पत्रकार के उत्पीड़न मामले में पुलिस प्रशासन पर घोर लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं।
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया गया है कि 16 जून 2026 को एडव इन्वेंशन एकेडमी (ADV INVENTION ACADEMY) की अवैध सीलिंग की गई। इसके अलावा, महिला पत्रकार और अर्चना प्रजापति के साथ अनेक बार अभद्रता की घटनाएं हुईं, जिसके खिलाफ जिलाधिकारी सहित शासन-प्रशासन और सरकार को कई बार ज्ञापन व शिकायती पत्र सौंपे गए। आरोप है कि पीएमओ पीजी (PMO PG) और जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायतों का केवल कागजी निस्तारण किया जा रहा है, जिसमें आरोपी को ही जांच अधिकारी बना दिया जाता है। आरोप यह भी है कि एफआईआर के विवेचक और ऑनलाइन शिकायतों के जांच अधिकारी लगभग एक ही होते हैं, जिससे पैसा और दबाव बढ़ने पर रिपोर्ट बदल दी जाती है और न्याय-अन्याय से कोई फर्क नहीं पड़ता।
कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को पूरी तरह से मजाक बताते हुए मामले में पर्याप्त साक्ष्य होने का दावा किया गया है। एसपी से मांग की गई है कि एफआईआर संख्या 328/2025 और अर्चना प्रजापति मामले की विवेचना किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए और दोषियों का केवल तबादला करने के बजाय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका (WRIT-C 24587/2026 – दिनांक 20.07.2026) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC: 80652/CR/2026) में भी मामला दर्ज कराया गया है।
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