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उत्तर प्रदेश में 17 अतिपिछड़ी जातियों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए उत्तराखंड शिल्पकार आरक्षण की तर्ज पर संवैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए समाज के अधिवक्ताओं और समर्थ लोगों से एकजुट होने की विनम्र अपील की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के 31 दिसंबर 2016 के आदेश के अनुपालन में अब तक कोई भी नेता, संगठन या पार्टी नियमों के तहत यह लड़ाई नहीं लड़ सका है, जिसके कारण इन जातियों का हक और सामाजिक न्याय लंबे समय से लंबित है। पूर्व में इस दिशा में कदम उठाने वाले लोग अपने निजी स्वार्थ में सत्ता की मलाई काटने में व्यस्त हो गए।
इस बार की लड़ाई को अलग बताते हुए स्पष्ट किया गया है कि ‘अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान’ ने संविधान की नब्ज टटोलते हुए इस मामले को पुनः माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंचा दिया है। समाज के प्रति समर्पित अधिवक्ता श्री दीपक कुमार प्रजापति ने जनहित के इस महत्वपूर्ण मामले को निशुल्क लड़ने का बीड़ा उठाया है। सभी लोगों से अपील की गई है कि वे अलग-अलग याचिकाओं और मंतव्यों पर अपनी ऊर्जा व्यय करने के बजाय एक साथ मिलकर इस लड़ाई का समर्थन करें, क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी उत्तराखंड का शिल्पकार मॉडल ही इस आंदोलन का मुख्य आधार बनेगा।
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