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संतकबीरनगर के धनघटा में स्थित नवसृजित ‘एडीवी इन्वेंशन एकेडमी, पुतसर’ की अवैध सीलिंग और तत्कालीन एसडीएम रविकांत चौबे के बुलंदशहर तबादले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले को लेकर ‘अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान’ द्वारा जिलाधिकारी संतकबीरनगर को तीन प्रार्थना पत्र सौंपकर स्कूल को तत्काल डी-सील कराने और वहां पढ़ने वाले 150 गरीब व अतिपिछड़े वर्ग के बच्चों की शिक्षा बहाल कराने की पुरजोर मांग की गई है। इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका संख्या WRIT-C 24587/2026 पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने 3 जुलाई 2026 को स्पष्ट आदेश दिया है कि बीएसए, जिलाधिकारी, एसडीएम धनघटा, नायब तहसीलदार, बीईओ, बेसिक शिक्षा सचिव और मान्यता समिति सहित सभी दोषियों को पक्षकार बनाकर 20 जुलाई 2026 को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित किया जाए। इस गंभीर मामले की शिकायत 4 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा विभाग) और इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को रजिस्टर्ड डाक द्वारा भी भेजी गई है।
इस मामले में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि 16 जून 2026 को तत्कालीन एसडीएम धनघटा रविकांत चौबे द्वारा बिना किसी सुनवाई और बिना किसी लिखित आदेश के स्कूल को अवैध रूप से सील कर दिया गया था। इसके अलावा, एसडीएम पर एक महिला पत्रकार के साथ अभद्रता करने का भी आरोप है, जिसकी शिकायत जिलाधिकारी और शासन स्तर पर पहले ही की जा चुकी है। अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर करते हुए आरोप लगाया गया है कि बीएसए का एक बैकडेटेड पत्र, जो साजीश के तहत 1 जून को डाक से बुक कराया गया था, एक तरफ कहता है कि आवेदन 12 जुलाई 2026 तक वैध है, लेकिन दूसरी तरफ ऑनलाइन न होने का बहाना बनाकर 17 जून 2026 को ही इसे खारिज कर दिया गया। इस मनमानी कार्रवाई के कारण 150 गरीब और अतिपिछड़े वर्ग के बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है, जो शिक्षा के अधिकार कानून (RTE Act 2009) का खुला उल्लंघन है।
इस बड़ी गड़बड़ी के बीच, अवैध सीलिंग की कार्रवाई करने वाले एसडीएम रविकांत चौबे का बुलंदशहर स्थानांतरण कर दिया गया है। इस कदम पर तीखे सवाल खड़े किए गए हैं कि आखिर यह तबादला सजा है या फिर इनाम? जब मामला माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तो इस प्रकार के तबादले से लीपापोती क्यों की जा रही है? चेतावनी दी गई है कि यदि स्कूल को 24 घंटे के भीतर डी-सील नहीं किया गया, तो दोषियों के खिलाफ व्यक्तिगत अवमानना याचिका और आपराधिक परिवाद दाखिल किया जाएगा। साथ ही, दोषी अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 166ए, 188, 341 और एससी/एसटी एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है। इस अन्याय के खिलाफ न्याय की लड़ाई को मजबूती से लड़ने का संकल्प दोहराया गया है क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।
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