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संत कबीर नगर के घनघटा में अंधविश्वास और पाखंडवाद के खिलाफ तीखा हमला बोलते हुए लोगों को जागरूक होने का संदेश दिया गया है। देश की बहुसंख्यक आबादी की मुख्य समस्याओं के रूप में लचर कानून व्यवस्था और भ्रष्ट कार्यप्रणाली को रेखांकित किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे धार्मिक आस्था में गोता लगाने के बजाय देश के संविधान को साक्षी मानकर अपनी जनसमस्याओं के न्यायसंगत निस्तारण के लिए खुद संघर्ष करें।
समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों को सचेत करते हुए कहा गया है कि वे इस गलतफहमी को मन से निकाल दें कि कोई नेता उनका उत्थान करेगा। नेता केवल अपनी राजनीति चमकाने में लगे रहते हैं, उन्हें जनता के उत्थान या पतन से कोई सरोकार नहीं है। जिन लोगों को जनता मसीहा समझती है, वही काम बिगाड़ते हैं और दलाली व फरेब का शिकार बनाते हैं। आपसी विघटन ही पतन का मुख्य कारण है, इसलिए सामाजिक एकीकरण और ओबीसी व प्रजापति समाज की एकता अत्यंत आवश्यक है ताकि दलाली के बजाय हक और न्याय हासिल किया जा सके।
योगी सरकार, पीएमओ इंडिया और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संबोधित इस संदेश में चेतावनी दी गई है कि समाज को बांटने वाले बहुरूपिये कभी भी संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की वाजिब लड़ाई नहीं लड़ना चाहते। वे लोगों को सिर्फ मानसिक गुलाम बनाकर अपना काम निकालना चाहते हैं। यदि लोग पढ़-लिखकर जागरूक हो जाएंगे और संविधान का अनुसरण करने लगेंगे, तो तानाशाहों की जी-हुजूरी करने वाला कोई नहीं बचेगा। इसीलिए अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान के तहत लोगों से जागने और हक की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया गया है।
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