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संत कबीर नगर जनपद की धनघटा तहसील अंतर्गत हैसर धनघटा नगर पंचायत के प्राचीन व ऐतिहासिक शिव मंदिर हशेस्वर नाथ धाम परिसर की भूमि पर हुए अवैध कब्जे पर जल्द ही प्रशासन का बुल्डोजर चल सकता है। मंदिर परिसर में बढ़ रहे अवैध अतिक्रमण से ग्रामीणों में नाराजगी थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने नगर पंचायत अध्यक्ष रिंकू मणि से शिकायत कर धार्मिक आस्था की सुरक्षा की मांग की थी। चेयरमैन रिंकू मणि ने जिलाधिकारी से मिलकर जांच कराने का प्रार्थना पत्र सौंपा था, जिसके बाद जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच सौंपी थी।
मामले की जांच अपर जिलाधिकारी न्यायिक चंद्रेश सिंह और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी विनय कुमार सिंह द्वारा की गई। जांच अधिकारियों द्वारा 1359 व 1360 फ़सली अभिलेखों से लेकर गोशवारा का अवलोकन किया गया, जिसमें कूट रचना के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। जांच में सामने आया कि चकबंदी के दौरान षडयंत्र करके शिवजी भूमिधर और चंद्रबली सरवराकार के स्थान पर कुछ लोगों ने अपने नाम से वरासत करवा ली थी। अधिकारियों ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि सरवराकार किसी संस्था का केवल प्रबंधक होता है, वह संपत्ति न तो बेच सकता है और न ही वरासत कर सकता है। खतौनी में त्रुटिवश 301 स दर्ज हुई यह भूमि वास्तव में 301 ख है, जो 0.344 (27 बिस्वा से अधिक) है। दोनों अधिकारियों की जांच में मंदिर की भूमि पर पूर्व में अवैध कब्जे और वर्तमान में भी अवैध कब्जे के प्रयास की पुष्टि हुई है, जिसके बाद जिलाधिकारी स्तर से कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
इस मामले में नीलमणि ने कहा कि हशेस्वर नाथ के प्राचीन मंदिर की पौराणिकता को कायम रखना और महादेव के भक्तों की आस्था का सम्मान करना सर्वोपरि है। जिला प्रशासन द्वारा मंदिर की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराते ही पूरे परिसर को आकर्षक बनाकर पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
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