शुरू न्यूज़
शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने वाले समाजसेवियों का सम्मान बचना एक बड़ी बात है, लेकिन असली मुद्दा जन शिकायतों की जांच करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को ठीक करना है। यहीं से धरातल की न्याय व्यवस्था बिगड़ती है, फाइलें दबा दी जाती हैं, शिकायतें कूड़ेदान में जाती हैं और शिक्षा, भू-माफिया तथा भ्रष्टाचार फलता-फूलता है। केवल एक इस्तीफा प्रतीक हो सकता है लेकिन उससे सत्ता नहीं जाएगी और बदलाव भी नहीं आएगा, क्योंकि सत्ता व्यक्ति से नहीं बल्कि प्रणाली से चलती है। इस स्थिति में वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे जी को अनसुना करना दिवालियापन का शिकार होना कहा जाएगा।
टीम मोदी को हल्के में लेना भूल होगी। अगर UGC 2026 लागू करके शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त हुई, जाति जनगणना 2027 पर सही काम हुआ, और वंचित-अतिपिछड़े-उपेक्षित वर्गों को संख्यात्मक आरक्षण देते हुए संवैधानिक हक व सामाजिक न्याय का मामला साध लिया गया, तो परिस्थितियाँ बदलते देर नहीं लगेगी। इसके साथ ही स्पष्ट मांगें उठाई गई हैं कि भ्रष्ट जांच अधिकारी पर भारी जुर्माने के साथ आजीवन कारावास अथवा फांसी का कानून बने, UGC 2026 में पारदर्शिता लाई जाए, जाति जनगणना के साथ वंचित व अति-पिछड़े वर्गों को संख्यात्मक आरक्षण और हिस्सेदारी मिले, ग्राम समाज तथा मंदिर की सार्वजनिक जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए, और भेदभाव मुक्त, सस्ती व समान शिक्षा प्रणाली की स्थापना की जाए।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड