पौधे के बीज से तैयार तेल ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली,एम्स के चिकित्सकों ने खोले मौत के राज
गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों ने एक ऐसी बीमारी के कारण का पता लगाया है,जिसने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली।मामला पूर्वांचल के सलेमपुर क्षेत्र का है,जहां एक परिवार में लगातार तीन लोगों की मौत के बाद बीमारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।परिवार में अब सिर्फ पिता और बेटा ही बचे हैं।दोनों मरीजों को गोरखपुर एम्स लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद बीमारी के कारण का पता लगाया।सामने आया कि बीमारी की वजह कोई सामान्य संक्रमण नहीं,बल्कि जहरीले पौधे के बीज से तैयार किया गया तेल था।यूपी के सलेमपुर क्षेत्र के एक परिवार में तीन लोगों की मौत हो गई थी। परिवार के बचे दो सदस्य यानी पिता और बेटे को गोरखपुर एम्स लाया गया।मरीजों में पैरों में दर्द और सूजन समेत कई लक्षण सामने आए।डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की तो शुरुआती स्तर पर ही बीमारी के पीछे की वजह सामने आ गई। जानकारी के मुताबिक,परिवार के लोगों को किसी ने जोड़ों के दर्द में फायदा होने की बात कहकर आर्जिमोन मैक्सिकाना के बीज इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।इसी पौधे के बीज से तेल निकाला गया और परिवार के लोगों ने उस तेल का इस्तेमाल खाना बनाने में किया।इसके बाद परिवार के सदस्यों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आईं।डॉक्टरों के मुताबिक,आर्जिमोन मैक्सिकाना के बीज से निकला तेल जहरीला होता है और इसके सेवन से एपिडेमिक ड्रॉपसी नाम की बीमारी हो सकती है।इस बीमारी में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन समेत कई गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।एम्स की टीम ने मरीजों के लक्षणों और उनके इस्तेमाल किए गए तेल की जानकारी को जोड़कर बीमारी के कारण की पहचान की।सलेमपुर में एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी और दो लोग बचे थे,बाप और बेटा उन्हें हमारे पास भेजा गया।हमारे डॉक्टरों की टीम ने उन्हें देखा और दूसरे दिन ही समझ में आ गया कि उनके लक्षण किस वजह से हैं। सरसों के पौधे से मिलता-जुलता एक पौधा होता है।आर्जिमोन मैक्सिकाना। इसके बीज का तेल बनाकर परिवार के लोगों ने उसका सेवन किया था।उसी की वजह से उन्हें एपिडेमिक ड्रॉपसी की बीमारी हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम लोग ऐसे जहरीले तेल या पौधे की पहचान कैसे करें और इससे कैसे बचें। गोरखपुर एम्स की निर्देशक डॉक्टर विभा दत्ता ने कहा की सलाह साफ है कि खाने के तेल के तौर पर केवल प्रमाणित और सुरक्षित तेल का ही इस्तेमाल किया जाए। किसी भी अनजान पौधे के बीज या उससे निकाले गए तेल का सेवन सिर्फ इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि वह किसी दूसरे पौधे जैसा दिखाई देता है या किसी ने उसे किसी बीमारी में फायदेमंद बताया है।जोड़ों का दर्द हो या शरीर में किसी तरह की सूजन, उसका इलाज खुद से करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।गोरखपुर एम्स में सामने आया यह मामला यह भी बताता है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी घरेलू नुस्खे या अनजान पौधे से तैयार तेल का सेवन कितना गंभीर हो सकता है।एम्स निदेशक विभा दत्ता ने लोगों से अपील की है कि किसी के कहने पर बीमारी के इलाज के लिए कोई भी चीज खाने या इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। खासकर जोड़ों के दर्द जैसी समस्या में पहले डॉक्टर को दिखाना चाहिए।किसी व्यक्ति के बताए घरेलू नुस्खे या बिना पहचान वाले पौधे के बीज और तेल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।कुछ लोग बोलते हैं कि ये खा लो, उससे दर्द ठीक हो जाएगा इन बातों को ध्यान से सुनना चाहिए और इस पर अंधविश्वास नहीं करना चाहिए। किसी डॉक्टर से कंसल्ट करके ही दवा लेना चाहिए। पहली बात तो यह है कि जोड़ों का अगर दर्द है, यह कोई और बीमारी है तो आप पहले डॉक्टर को दिखाइए और डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लीजिए और इलाज करवाइए।
गोरखपुर एम्स की यह पहल एक परिवार में बीमारी की वजह पता लगाने के साथ-साथ लोगों के लिए भी बड़ा संदेश है,अनजान पौधे,बीज या तेल को बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल न करें और किसी भी बीमारी का इलाज खुद से करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।
बाइट-विभा दत्ता निदेशक एम्स गोरखपुर
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