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संत कबीर नगर जिले की धनघटा तहसील में 22 जुलाई को एंटी करप्शन टीम द्वारा चकबंदी लेखपाल अभय सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद पूरे तहसील क्षेत्र में दहशत और सन्नाटे का माहौल बना हुआ है। 23 जुलाई को भी सरकारी कार्यालयों में दिनभर इस कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही। इस ताजा घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है।
जिले में पिछले एक दशक के दौरान पुलिस, राजस्व, विद्युत और विकास समेत कई विभागों में एंटी करप्शन की ताबड़तोड़ कार्रवाइयां हुई हैं। 26 अप्रैल 2014 को पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक श्याम सुंदर प्रसाद को रिश्वत के आरोप में पकड़ा गया था। इसके बाद 7 अप्रैल 2016 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक भानु सिंह (₹5,000 रिश्वत), 31 अगस्त 2016 को पौली चौकी प्रभारी विनोद कुमार, 27 जून 2019 को खलीलाबाद के दरोगा श्रीकांत चौबे, 28 जुलाई 2021 को धनघटा थाने के सेकेंड अफसर राममिलन यादव और 18 जनवरी 2022 को सहायक लेखाकार अवधेश मिश्रा को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
कार्रवाइयों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। मार्च 2023 में मेहदावल के लेखपाल अश्वनी मिश्रा, 22 अगस्त 2023 को खलीलाबाद तहसील के लेखपाल रामअवध सिंह (₹5,000 रिश्वत), 4 जनवरी 2024 को डीपीआरओ कार्यालय के पेशकार मुकेश यादव और 29 मार्च 2024 को यूपीपीसीएल के अवर अभियंता अश्वनी व उनके सहयोगी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 4 सितंबर 2024 को धनघटा के लेखपाल इम्तियाज हुसैन को ₹10,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया, जबकि 5 सितंबर 2024 को एक अन्य लेखपाल पर कार्रवाई हुई। डीपीआरओ कार्यालय के सफाईकर्मी राजन कुमार और बीएसए कार्यालय के बाबू सरतेंदू भी एंटी करप्शन के शिकंजे में आ चुके हैं।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से तहसील और अन्य सरकारी दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों के बीच भारी हड़कंप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई से भ्रष्ट कर्मचारियों में डर जरूर बनता है, लेकिन स्थायी सुधार के लिए विभागीय स्तर पर सख्त निगरानी और जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। एंटी करप्शन टीम की नजरें अब भी सुविधा शुल्क मांगने वालों पर टिकी हैं और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कई और चेहरों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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