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संत कबीर नगर के धनघटा तहसील क्षेत्र के बसवारी गांव में स्थित लगभग 300 वर्ष पुराना ऐतिहासिक बाबा बैजूनाथ शिव मंदिर रविवार को अपराह्न करीब एक बजे अचानक धराशायी हो गया। मंदिर का शिखर गिरने के साथ ही पूरा मंदिर ढह गया, जिससे उसका गर्भगृह पूरी तरह मलबे से भर गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे के समय मंदिर के भीतर कोई भी श्रद्धालु उपस्थित नहीं था, जिसके कारण एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि 25 जून 2026 को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मंदिर का दौरा किया था और बाबा बैजूनाथ का विधिवत पूजन-अर्चन व जलाभिषेक किया था। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि यह ऐतिहासिक मंदिर लगभग 300 साल पुराना था, तो मुख्यमंत्री के आगमन से पहले क्या इसकी संरचनात्मक मजबूती (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) की किसी तकनीकी विभाग से जांच कराई गई थी? लोगों का यह भी पूछना है कि यदि जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट क्या थी, और यदि नहीं हुई तो क्यों नहीं कराई गई?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 12 बजे मंदिर की दीवारों में दरारें देखी गई थीं, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया और करीब एक घंटे बाद मंदिर का शिखर भरभराकर गिर गया। मंदिर के पुजारी प्रहलाद गोस्वामी ने बताया कि रोजाना की तरह सुबह पूजा-अर्चन की गई थी, गर्भगृह को सजाया गया था और दर्जनों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक भी किया था। इसके बाद जब वे अपने कमरे में बैठे थे, तभी दोपहर करीब एक बजे जोरदार आवाज आई और बाहर आकर देखने पर पता चला कि मंदिर का शिखर गिर चुका है और गर्भगृह मलबे से भरा है।
हादसे के बाद ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, पुनर्निर्माण, मलबा हटाने और पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग उठाई है। दूसरी ओर, प्रशासन की तरफ से अभी तक यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले मंदिर की कोई तकनीकी सुरक्षा जांच कराई गई थी या नहीं।
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