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भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसूचित जाति सूची संशोधन प्रकोष्ठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को कुम्हार जाति को शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने की यथोचित कार्यवाही करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद कुम्हार सहित 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का संवैधानिक आरक्षण कवच दिलाने की 31 साल पुरानी मांग एक बार फिर तेज हो गई है।
मंत्रालय ने पत्र संख्या No.RL-17020/1/2026-RL Cell (दिनांक 06/07/2026) के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, समाज कल्याण को संत कबीर नगर के ग्राम-पुतसर निवासी श्री अनिल कुमार प्रजापति के 12 जून 2026 के अभ्यावेदन पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया है। मामले की पृष्ठभूमि में 31 अगस्त 1995 का उत्तर प्रदेश सरकार का वह शासनादेश है जिसके तहत कुम्हार जाति को शिल्पकार श्रेणी में अनुसूचित जाति का दर्जा दिया गया था। इसके बाद 31 दिसंबर 2016 को उत्तर प्रदेश सरकार ने कुम्हार समेत 17 अतिपिछड़ी जातियों को पिछड़ी सूची से बाहर कर अनुसूचित जाति के समान सुविधा देने का आदेश दिया था। हाल ही में, 27 फरवरी 2025 को जिलाधिकारी संत कबीर नगर ने भी पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र पर रोक लगाते हुए कुम्हारों को शिल्पकार श्रेणी में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया था।
इतने स्पष्ट आदेशों और सालों के इंतजार के बावजूद अब तक इन जातियों को अधिकार और सुरक्षा नहीं मिल सकी है, जिसे लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है। मामले को लटकाने पर सवाल उठाते हुए तुरंत तीन सूत्री मांगें रखी गई हैं। इसके तहत कुम्हार/प्रजापति सहित सभी 17 अतिपिछड़ी जातियों को एनआईसी के ऑनलाइन पोर्टल पर पिछड़ी सूची से हटाकर तुरंत अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने, उन्हें तत्काल अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने और शिक्षा, नौकरी व राजनीति में एससी वर्ग का संवैधानिक आरक्षण कवच लागू करने की मांग की गई है। ‘रील नहीं रिजर्वेशन और फोटो नहीं फैसला चाहिए’ के नारे के साथ वंचित समाज ने एकजुट होकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
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