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देश को राजनीतिक अखाड़ा बनाने वालों को कड़ा संदेश देते हुए “वन नेशन वन इलेक्शन” के बजाय “वन नेशन वन एजुकेशन” बिल को पहले लाने की मांग की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार को तुरंत खत्म करने और वंचित, अतिपिछड़े, भूमिहीन व मजदूर वर्ग को उनके संवैधानिक हक, अधिकार और सामाजिक न्याय देने पर बल दिया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि जब समाज का निचला तबका विकास करेगा, तभी देश खुद-ब-खुद समृद्ध होगा और उस दिन किसी को वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
प्रजापति समाज सहित तमाम वंचितों पर हो रहे जुल्म, ज्यादती, अन्याय और उत्पीड़न का समाधान रील या फोटो से नहीं, बल्कि संवैधानिक आरक्षण से करने की मांग उठाई गई है। “पहले शिक्षा, पहले सुरक्षा, फिर राजनीति” के सिद्धांत पर चलते हुए “वन नेशन वन इलेक्शन” नहीं, बल्कि “वन नेशन वन एजुकेशन + सामाजिक न्याय” का नारा दिया गया है। साथ ही, “बात रील से नहीं, हक से होगी” के संकल्प के साथ आगामी 20 जुलाई को सच की जीत होने का दावा किया गया है।
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