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इलाहाबाद हाईकोर्ट में आगामी 20 जुलाई 2026 को रिट याचिका (Writ) 24587/2026 के तहत ADV इन्वेंशन एकेडमी, पुतसर (ADV Invention Academy) के मामले की सुनवाई होनी है। इस मामले को केवल एक स्कूल की लड़ाई नहीं, बल्कि अतिपिछड़ों, वंचितों और भूमिहीनों की शिक्षा तथा उनके अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
इस मुद्दे पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा गया है कि यदि निषाद या राजभर जैसे लड़ाकू समाज में यह प्रकरण होता, तो 17 अतिपिछड़ी जातियों का बहुप्रतीक्षित आरक्षण मामला अब तक निर्विवाद रूप से हल हो गया होता और पूरे उत्तर प्रदेश में समान शिक्षा की मुहिम चल रही होती। मिट्टी के पेशे से जुड़े कुम्हार समाज पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि यह समाज एकजुट होकर संघर्ष का रास्ता नहीं चुन पाता और अन्याय के खिलाफ केवल सोशल मीडिया पर हंगामा करता है, जबकि असली सुरक्षात्मक कवच केवल संवैधानिक आरक्षण से ही संभव है।
टिकट की तलाश में रहने वाले राजनीतिक सौदागरों और उनके समर्थकों की कड़ी आलोचना की गई है, जो केवल फोटो और रील बनाकर राजनीति करते हैं परंतु कोई स्थाई संवैधानिक समाधान नहीं दिलाते। इस मामले में तुरंत 17 अतिपिछड़ी जातियों को संवैधानिक आरक्षण का कवच देने, ADV इन्वेंशन एकेडमी को डी-सील करने और देश में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ के साथ सामाजिक न्याय लागू करने की मांग उठाई गई है। अब सोशल मीडिया पर रील और फोटो बनाने के बजाय ठोस फैसले तथा आरक्षण की मांग बुलंद की जा रही है।
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