शुरू न्यूज़
उत्तर प्रदेश में ‘अति पिछड़ा एकीकरण महाअभियान’ के तहत जाति, धर्म और संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर गरीब, कमजोर और आम जनमानस को एकजुट करने का जोरदार आह्वान किया गया है। इस अभियान के अनुसार, ‘अतिपिछड़ा’ शब्द का आशय किसी विशेष जाति, धर्म, मजहब या संप्रदाय से नहीं है, बल्कि समाज के हर उस गरीब और कमजोर व्यक्ति से है जो सर्वसमाज में पाया जाता है। लोगों से पुरजोर अपील की गई है कि वे जाति-जाति की गुटबाजी से ऊपर उठकर “जमात” की ओर अपने कदम बढ़ाएं, क्योंकि जनहित के मुद्दे ही सर्वोपरि हैं।
इस महाअभियान में अनिल प्रजापति के स्वर को मुखर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यह लड़ाई किसी कुर्सी की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को बदलने की है। सांसद, विधायक या मंत्री बनकर कोई व्यक्ति केवल अपना और अपने सगे-संबंधियों का भला कर सकता है, लेकिन भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा और संवैधानिक आरक्षण से समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े हर बच्चे को लाभ पहुंचेगा, चाहे वह इस मूवमेंट का विरोधी ही क्यों न हो। अभियान का मानना है कि जब एक संगठित ताकत खड़ी होगी, तो टिकट, निगम का चेयरमैन और पद-प्रतिष्ठा अपने आप पीछे दौड़ेंगे। इसी संदेश के साथ लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है कि जो जाति में बांटता है वो कमजोर करता है और जो जमात में जोड़ता है वो सरकार बनाता है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड