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उत्तर प्रदेश में शिल्पकार, मझवार और तुरैहा जैसी जातियों के आरक्षण को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है। नियम के अनुसार, इसके लिए सबसे पहले जिलाधिकारी से अनुरोध कर साक्ष्य के आधार पर अनुच्छेद 341 का कंप्लायंस कराया जाता है, जिसके बाद तहसील स्तर पर जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जाता है। आपत्ति आने पर जिला कमेटी, कमिश्नर स्तर और फिर प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग के समक्ष अपील करने का प्रावधान है। यदि तीन महीने के भीतर सुनवाई नहीं होती है, तभी उच्च न्यायालय और अंत में सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी चाहिए।
महाअभियान का आरोप है कि कुछ स्वार्थी तत्व पार्टीगत राजनीति के तहत समाज को बांटकर वोट डायवर्ट करने का खेल खेल रहे हैं। कुछ चतुर लोग बिना नियमों का पालन किए और भारत सरकार के अनुसूचित जाति सूची संशोधन प्रकोष्ठ से आदेश कराए बिना ही सीधे कोर्ट चले जाते हैं। इसी गलत प्रक्रिया के कारण आज तक 17 अतिपिछड़ी जातियों का बहुप्रतीक्षित आरक्षण मामला लंबित पड़ा हुआ है।
इन सभी नियमों का पालन करते हुए अब अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान इलाहाबाद हाईकोर्ट में दस्तक दे चुका है। महाअभियान ने उत्तर प्रदेश के उन सभी कुम्हार भाइयों से व्हाट्सएप पर साक्ष्य भेजने की अपील की है, जिन्हें कुम्हार/प्रजापति के जिक्र के साथ शिल्पकार श्रेणी का एससी प्रमाण पत्र जारी हो चुका है। इसके साथ ही, जिन लोगों के आवेदन तहसील से किन्हीं कारणों से निरस्त कर दिए गए हैं, उन्हें भी अपने निरस्तीकरण के साक्ष्य भेजने को कहा गया है ताकि इन्हें तुरंत हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जा सके।
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