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बेतिया के छोटा रमना और स्टेडियम रोड स्थित मीना बाजार के व्यवसायियों का धरना रविवार को और तेज हो गया, जब सिकटा के पूर्व विधायक एवं भाकपा माले नेता विमेंद्र गुप्ता धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने व्यवसायियों की मांगों को जायज बताते हुए जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रशासन से मूल डीपीआर के अनुरूप सड़क निर्माण कराने तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
धरना का नेतृत्व कर रहे मीना बाजार छोटा रमना व्यवसायी संघ के उपाध्यक्ष धर्मेश कुमार ने बताया कि यहां की करीब 85 दुकानें महारानी जानकी कुंवर के समय से उनके पूर्वजों के कब्जे में हैं। 1959 में जमींदारी उन्मूलन के बाद यह भूमि बिहार सरकार में निहित हुई और खास महाल नीति-1974 के तहत व्यवसायियों को विधिवत लीज बंदोबस्त (पट्टा) मिला। व्यवसायी लगभग 40 वर्षों से सरकार को लगान दे रहे हैं और करीब 90 वर्षों से मकान बनाकर कारोबार कर रहे हैं।
व्यवसायियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान घोषित चार लेन सड़क परियोजना के तहत वर्ष 2019 की मूल डीपीआर और नक्शे से छेड़छाड़ की जा रही है। मूल डीपीआर में 42 फीट सर्विस रोड और 28 फीट भूमि अधिग्रहण का प्रावधान था, लेकिन वर्ष 2020-21 में प्रेक्षागृह का निर्माण सड़क की लगभग 14 फीट भूमि पर कर दिया गया। प्रेक्षागृह का अतिक्रमण हटाने के बजाय सड़क को दुकानों की ओर मोड़ दिया गया और इसी आधार पर अंचल कार्यालय ने पट्टा रद्द कर दुकानों को अतिक्रमण घोषित कर दिया, जबकि पट्टा निरस्त करने का अधिकार केवल सक्षम सिविल कोर्ट को है।
धर्मेश कुमार के अनुसार, 9 जुलाई को अंचल अधिकारी से पट्टा रद्द करने के आदेश की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी ताकि 7 अगस्त की अंतिम तिथि से पहले अपील की जा सके, लेकिन प्रति दिए बिना ही 27 जुलाई की सुबह 9 बजे अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। व्यवसायियों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर न्यायसंगत निर्णय नहीं होता और कानूनी प्रक्रिया का पूरा अवसर नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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