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पश्चिम चंपारण के रामनगर प्रखंड स्थित सोनखर पंचायत की शिवपुर कॉलोनी से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां ग्रामीणों ने सरकारी व्यवस्था की अनदेखी के बाद खुद के प्रयासों से पहाड़ी नदी पर पुल का निर्माण कर लिया है। करीब 50 वर्षों तक स्थायी पुल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब केवल आश्वासन ही मिले, तो ग्रामीणों ने हार मानने के बजाय खुद अपनी किस्मत बदलने का निर्णय लिया। सामूहिक भागीदारी और एकजुटता दिखाते हुए गांव वालों ने चंदा जुटाया और श्रमदान कर करीब ढाई लाख रुपये की लागत से 60 फीट लंबा लोहे का पुल तैयार कर दिया है।
बरसों से यह पहाड़ी नदी ग्रामीणों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। बरसात के मौसम में बांस-लकड़ी का अस्थायी चचरी पुल बह जाने के कारण गांव का संपर्क कट जाता था, जिससे स्कूली बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट खड़ा हो जाता था। मरीजों को अस्पताल ले जाने और महिलाओं व आम ग्रामीणों को उफनती नदी पार करने के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ती थी। ग्रामीणों के अनुसार, दशकों तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस स्वयं निर्मित पुल को अब हजारों लोगों की जीवनरेखा माना जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि अब उनकी पढ़ाई, खेती और स्वास्थ्य सुविधाएं बरसात के कारण बाधित नहीं होंगी। यह पहल न केवल गांव की आत्मनिर्भरता और मजबूत इरादों का प्रतीक बनी है, बल्कि विकास के सरकारी दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आज जब ग्रामीण अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए खुद पुल बनाने को मजबूर हैं, तो यह व्यवस्था की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। फिलहाल, शिवपुर कॉलोनी के निवासियों की यह पहल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और बेपरवाह सिस्टम को आईना दिखा रही है।
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