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संत कबीर नगर जिले के वसवारी गांव में स्थित लगभग 300 वर्ष पुराना स्वयंभू बाबा बैजूनाथ मंदिर का गर्भगृह रविवार को अचानक भरभराकर ढह गया। गनीमत यह रही कि घटना के समय गर्भगृह के भीतर कोई भी श्रद्धालु मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। हादसे की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मंदिर परिसर में जमा हो गए।
इस घटना की सूचना मिलने के बाद जिलाधिकारी आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा और धनघटा के विधायक गणेश चन्द्र चौहान तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने मंदिर परिसर का बारीकी से निरीक्षण कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने संबंधित विभाग के अफसरों को निर्देश दिया है कि वे क्षतिग्रस्त ढांचे का तकनीकी परीक्षण करवाएं और आवश्यक कार्रवाई अमल में लाएं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंदिर परिसर में सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बाबा बैजूनाथ मंदिर इस पूरे क्षेत्र की आस्था का एक बड़ा केंद्र होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर भी है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। हाल ही में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मंदिर में आकर पूजा-अर्चना की थी और इसके सौंदर्यीकरण व विकास कार्यों की सौगात दी थी। ऐतिहासिक धरोहर के इस मुख्य हिस्से के अचानक ध्वस्त हो जाने से श्रद्धालुओं में गहरी मायूसी और चिंता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेषज्ञों के जरिए इस पूरे मामले की जांच कराने और मंदिर के गर्भगृह को उसके सुरक्षित और मूल ऐतिहासिक स्वरूप में जल्द से जल्द पुनर्निर्मित करने की पुरजोर मांग की है।
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