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देश में पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध जानबूझकर किए जा रहे हैं ताकि धनबली और प्रभावशाली लोगों के बच्चों को फायदा पहुँचाकर गरीब, कमजोर और मेहनती प्रतिभाओं का गला घोंटा जा सके। शिक्षा व्यवस्था में आज भी अस्पृश्यता, असमानता और भेदभाव हावी है, क्योंकि सक्षम और सामर्थ्यवान तबका कभी नहीं चाहता कि निचले पायदान की प्रतिभाएं ऊपर आकर बराबरी पर खड़ी हों।
गाँव से शहर तक जारी इस अन्याय के जीते-जागते उदाहरण के रूप में संतकबीरनगर जनपद के महुली थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पुतसर में यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं पर जानलेवा हमला हुआ है, जहाँ स्थानीय पुलिस और शिक्षा विभाग माफियाओं के इशारे पर न्याय का गला घोंट रहे हैं। इसके अलावा गोरखपुर में सतीश प्रजापति को एलएलबी (LLB) की परीक्षा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
इसी वजह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना, आंदोलन और संसद मार्च पूरी तरह उचित है और हर युवा का नैतिक कर्तव्य इसका समर्थन करना है। सत्ता की आड़ में तानाशाही चलाने वाले और जी-हुजूरी करके मलाई काटने वाले जो लोग इस आंदोलन को ‘राजनीतिक रंग’ दे रहे हैं, उनसे बड़ा देशद्रोही कोई नहीं है, क्योंकि छात्र आंदोलन का समर्थन करने वाला देश का स्वतंत्र नागरिक अपना दायित्व निभा रहा है। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान द्वारा संचालित भेदभाव मुक्त सस्ती व समान शिक्षा मुहिम के तहत समाज से गुलामी का नाता तोड़कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया है।
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