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उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में राज्य कर विभाग के कार्यालय में जीएसटी 2.0 और ऑटोमोबाइल सेक्टर की चुनौतियों को लेकर व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs), कर अधिवक्ताओं और व्यापारी नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य जीएसटी के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) राजेश कुमार पान्डेय और विनय कुमार गुप्त द्वारा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आए बदलावों, नए टैक्स स्लैब और व्यापारियों के सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।
संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित व्यापारी नेताओं और ऑटोमोबाइल डीलर्स ने जीएसटी 2.0 के लागू होने के बाद गाड़ियों पर सेस (Compensation Cess) समाप्त होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में फंसे पुराने सेस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के ब्लॉक होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों ने बताया कि इस वजह से डीलर्स की एक बड़ी कार्यशील पूंजी (Working Capital) रुकी हुई है। इसके साथ ही कर अधिवक्ताओं और सीए ने तकनीकी व अनुपालन संबंधी कई महत्वपूर्ण सुझाव विभाग के समक्ष रखे।
व्यापारियों को संबोधित करते हुए उपायुक्त विनय कुमार गुप्त ने भरोसा दिया कि सरकार और विभाग का उद्देश्य हमेशा से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देना रहा है। उपायुक्त राजेश कुमार पान्डेय ने बताया कि जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाया गया है, जिससे ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग बढ़ी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि व्यापारियों के फंसे सेस क्रेडिट और तकनीकी दिक्कतों के प्रति विभाग पूरी तरह संवेदनशील है। इस संवाद कार्यक्रम में सहायक आयुक्त कुमार गौरव सिंह, धम्म प्रिय सहित प्रमुख ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्य रवि कुमार, निकेश पोद्दार, विवेक कुमार, नरेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ व्यापारी नेता श्रवण अग्रहरी, विनीत चड्ढा, अमित जैन और कर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अभिनव अग्रवाल, दीपक श्रीवास्तव व पंकज गुप्ता उपस्थित रहे।
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