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संतकबीरनगर स्थित राज्य कर विभाग के कार्यालय में जीएसटी 2.0 के क्रियान्वयन और ऑटोमोबाइल सेक्टर की व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs), कर अधिवक्ताओं और व्यापारी नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य जीएसटी के उपायुक्त राजेश कुमार पान्डेय और विनय कुमार गुप्त द्वारा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जीएसटी 2.0 के लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आए बदलावों, नए टैक्स स्लैब और व्यापारियों के समक्ष आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करना तथा उनका समाधान निकालना था।
संवाद के दौरान उपस्थित व्यापारी नेताओं और ऑटोमोबाइल डीलर्स ने गाड़ियों पर सेस (Compensation Cess) समाप्त होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में फंसे पुराने सेस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के ब्लॉक होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि इस वजह से डीलर्स की बड़ी कार्यशील पूंजी रुकी हुई है, जबकि सीए और कर अधिवक्ताओं ने विभाग के समक्ष तकनीकी व अनुपालन संबंधी सुझाव रखे। इस पर उपायुक्त विनय कुमार गुप्त ने भरोसा दिलाया कि सरकार और विभाग का उद्देश्य हमेशा से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना रहा है और विभाग फंसे हुए सेस क्रेडिट व तकनीकी दिक्कतों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। वहीं उपायुक्त राजेश कुमार पान्डेय ने बताया कि जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाए जाने से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मांग बढ़ी है।
इस संवाद कार्यक्रम में ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्य रवि कुमार, निकेश पोद्दार, विवेक कुमार, नरेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ व्यापारी नेता श्रवण अग्रहरी, विनीत चड्ढा, अमित जैन, कर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अभिनव अग्रवाल, दीपक श्रीवास्तव, पंकज गुप्ता, प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त कुमार गौरव सिंह व धम्म प्रिय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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