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लोकसभा चुनाव 2024 में सपा को मिला जन समर्थन उसकी किसी अच्छाई के कारण नहीं था, बल्कि भाजपा को पूर्ण बहुमत में लाने वाले वंचित, अतिपिछड़े, उपेक्षित और भूमिहीन मजदूर वर्ग के रुष्ट होकर डाइवर्ट होने के कारण था। चूंकि इस चुनावी टक्कर में अखिलेश यादव जी सीधे सामने थे, इसलिए विरोधाभासी लाभ सीधे उन्हें मिल गया। राम जन्मभूमि अयोध्या जैसी हाईटेक सीट पर भाजपा की हार के पीछे भी यही विचित्र कारण रहा है।
राज्य और केंद्र सरकार की सरकारी सूचना एजेंसियों और आईटी सेल के जिम्मेदार लोगों को खुले शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि कोई ईवीएम खेला या नया मोड़ नहीं आया, तो लोकसभा चुनाव की ही तरह 2027 में योगी सरकार का हारना निश्चित है। इसके बाद ही ‘एडीवी इन्वेंशन एकेडमी पुतसर’ और वंचित अतिपिछड़ी जातियों के रिजर्वेशन प्रकरण जैसे जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों का अर्थ समझ में आएगा।
संतकबीरनगर जिला प्रशासन को भी आगाह किया गया है कि वे किसी गफलत में न रहें; अनिल प्रजापति अगर ठान लें तो बिना एक भी पैसा खर्च किए सिर्फ एक टेलीफोन से 24 घंटे के भीतर हजार-दो हजार लोगों को जुटाकर धरना-प्रदर्शन के जरिए पूरे जिले को हिला सकते हैं। हालांकि, देश में लोकतंत्र का कोई मतलब न रह जाने और दिल्ली जंतर-मंतर के परिणाम को देखते हुए समर्थकों व शुभचिंतकों के समय और ऊर्जा को नुकसान न पहुंचाने की बात कही गई है।
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