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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एम्स के बाल रोग विभाग ने आईएपी सीपीआर दिवस के अवसर पर एक व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को हृदय गति अचानक रुकने की स्थिति को तुरंत पहचानने और तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) शुरू करने के प्रति जागरूक करना था। यह पूरा आयोजन एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। डॉ. विभा दत्ता ने इस अवसर पर कहा कि समय पर दिया गया सीपीआर जीवन और मृत्यु के बीच का निर्णायक अंतर बन सकता है, इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को इस जीवनरक्षक तकनीक का प्रशिक्षण देना एक सुरक्षित व संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को डेमो और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से सीपीआर की सही तकनीक सिखाई। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की हृदय गति अचानक रुक जाती है, तो मात्र 4 मिनट के भीतर सही तरीके से दिया गया सीपीआर पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने तक मरीज के बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। इस प्रशिक्षण अभियान में एम्स के संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, विद्यार्थियों, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। एम्स गोरखपुर ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट किया कि जीवन बचाने की यह महत्वपूर्ण कला केवल डॉक्टरों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के हर नागरिक को इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए।
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