एसपी संदीप मीना का पुलिसिंग मॉडल बना संतकबीरनगर की नई पहचान
धनघटा सन्त कबीर नगर
‘अलाव पर चर्चा’ के बाद अब ‘सुरक्षित बाजार अभियान’ से अपराधियों पर शिकंजा, जनता को बनाया सुरक्षा व्यवस्था का सहभागी
पुलिस की पहचान लंबे समय तक केवल कानून लागू करने वाली संस्था के रूप में रही है, लेकिन बदलते दौर में जनविश्वास और जनसहयोग को पुलिसिंग का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है। संतकबीरनगर में पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा इसी सोच को व्यवहार में उतारते हुए एक ऐसे पुलिसिंग मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिसमें अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ आम नागरिकों से लगातार संवाद भी प्राथमिकता में है। यही वजह है कि जिले में पुलिस की कई अभिनव पहलें न केवल प्रभावी साबित हुई हैं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हैं।
पिछले शीतकाल में शुरू किया गया “अलाव पर चर्चा” अभियान इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा। ठंड के मौसम में जब सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, तब जिले के प्रत्येक थाना क्षेत्र की पुलिस गांवों में अलाव के पास पहुंची। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की और गांव की गतिविधियों की जानकारी ली। यह केवल औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का पुल बनाने का एक प्रभावी प्रयास था।
इस पहल का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया। ग्रामीणों ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय पर पुलिस तक पहुंचानी शुरू की। पुलिस और गांव के लोगों के बीच संवाद बढ़ा तो अपराधियों की गतिविधियों पर भी नजर मजबूत हुई। चोरी जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में इस अभियान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण रहा कि “अलाव पर चर्चा” की चर्चा जिले से निकलकर पूरे उत्तर प्रदेश में हुई और इसे सामुदायिक पुलिसिंग का एक सफल उदाहरण माना गया।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अब पुलिस अधीक्षक ने “सुरक्षित बाजार अभियान” शुरू कराया है। दरअसल, साप्ताहिक बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जेबकतरी, मोबाइल चोरी और महिलाओं के साथ होने वाली छोटी-मोटी आपराधिक घटनाएं आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनती रही हैं। बाजारों में भीड़ का फायदा उठाकर सक्रिय होने वाले असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस ने यह विशेष अभियान शुरू किया है।
अभियान के तहत जिले के सभी थाना क्षेत्रों की पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के साप्ताहिक बाजारों, प्रमुख व्यावसायिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नियमित पैदल गश्त करें। पुलिसकर्मी दुकानदारों, व्यापारियों और ग्राहकों को जेबकतरे और मोबाइल चोरों से सतर्क रहने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
इस अभियान का असर अब दिखाई देने लगा है। बाजारों में खरीदारी करने आने वाले लोगों का कहना है कि पुलिस की नियमित मौजूदगी से सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। व्यापारियों का भी मानना है कि लगातार गश्त और जागरूकता अभियान से अपराधियों में पुलिस का भय पैदा हुआ है। इससे बाजारों का माहौल अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बन रहा है।
पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा का मानना है कि अपराध नियंत्रण केवल गिरफ्तारी और कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि आम नागरिक पुलिस का सहयोगी बन जाए तो अपराध की रोकथाम अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है। इसी उद्देश्य से जिले में संवाद आधारित पुलिसिंग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। गांवों में “अलाव पर चर्चा” और बाजारों में “सुरक्षित बाजार अभियान” इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि सामुदायिक पुलिसिंग का मॉडल अपराध रोकने में बेहद कारगर होता है। जब पुलिस जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और उन्हें सुरक्षा व्यवस्था का सहभागी बनाती है, तो लोगों का भरोसा बढ़ता है। यही भरोसा अपराध की सूचना समय पर पुलिस तक पहुंचाने में भी मदद करता है, जिससे बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। इस क्रम मे थाना प्रभारी हरिकेश भारती नें थाना अंतर्गत लोहरसन बाजार मे पहुंच कर लोगो को जागरूक किया
संतकबीरनगर पुलिस की इन पहलों ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक पुलिसिंग केवल सख्ती का नाम नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और जनसहयोग भी इसकी उतनी ही महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा की पहलें इसी संतुलित सोच को सामने लाती हैं, जहां कानून का सख्ती से पालन कराने के साथ जनता के विश्वास को भी समान महत्व दिया जा रहा है। यदि यह मॉडल इसी तरह निरंतर आगे बढ़ता रहा तो निश्चित रूप से जिले में अपराध नियंत्रण और पुलिस-जनता के संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
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