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संतकबीरनगर में प्रजापति समाज को एकजुट करने और उनके अधिकारों की लड़ाई को लेकर आक्रोश तेज हो गया है। समाज के ‘पार्टीगत सौदागरों और इच्छाधारी मठाधीशों’ पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया गया है कि जब एकीकरण महाअभियान की नीतियों के आगे समाज को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ में बांटने का इनका खेल फेल होने लगा, तो इन्होंने जनता का रुझान देखकर खुद भी एकीकरण का राग अलापना शुरू कर दिया है। इन सामाजिक गद्दारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा गया है कि निजी स्वार्थ साधने के लिए गली-कूचे में अलग-अलग गुट बनाकर ‘एकीकरण’ करने से बिखरा हुआ समाज कभी भी एक मंच पर नहीं आ पाएगा।
इस बात पर जोर दिया गया है कि जातिगत गुटबाजी कभी भी सफलता हासिल नहीं कर सकती क्योंकि यह सीधे तौर पर सामंतवादियों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को बढ़ावा देती है। समाज के उत्थान और सामूहिक विकास के लिए “जाति से जमात की ओर” बढ़ते हुए समकक्षीय एकीकरण पर बल देने का आह्वान किया गया है। “हम टूटेंगे नहीं, बिकेंगे नहीं” के संकल्प के साथ स्पष्ट किया गया है कि अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ही समाज के अधिकार छीनने और शिल्पकार व 17 जाति आरक्षण हासिल करने का एकमात्र रास्ता है। अनिल कुमार प्रजापति, वैद्य देवेंद्र कुमार प्रजापति और ADV इन्वेंशन एकेडमी की ओर से इस मुहिम को लेकर “जागो प्रजापति, अधिकार छीनो” की पुरजोर आवाज उठाई गई है।
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