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संत कबीर नगर के खलीलाबाद में सामने आए एक संदेश में पुरुषों और महिलाओं के प्रति समाज के दोहरे मानदंडों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। इस संदेश में सामाजिक सोच पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा गया है कि आखिर क्यों एक ही तरह के आचरण को लेकर महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग नजरिए से आंका जाता है।
संदेश में कई उदाहरण देते हुए पूछा गया है कि यदि कोई महिला किसी गैर मर्द के साथ वाहन या स्कूटी पर बैठती है, तो उसे चरित्रहीन मान लिया जाता है। इसके विपरीत, यदि कोई पुरुष किसी गैर स्त्री को अपने वाहन से छोड़ता है, तो उसे सेवा का काम माना जाता है। इसी तरह, महिलाओं के लिए गैर पुरुषों से दोस्ती करना पाप समझा जाता है, जबकि पुरुषों के लिए गैर स्त्रियों से दोस्ती रखने को सामाजिक होना करार दिया जाता है।
इसके अलावा, घर देर से लौटने को लेकर भी दोनों के लिए अलग-अलग पैमाने तय किए गए हैं। स्त्री के घर देर से लौटने पर उसे अय्याशी मान लिया जाता है, जबकि पुरुष के देर से आने को ‘ज्यादा काम’ समझा जाता है। यहाँ तक कि स्त्री के खुलकर हंसने को पुरुषों को रिझाने (आकर्षित करने) की कोशिश माना जाता है, जबकि पुरुषों के खुलकर हंसने को खुशियों का खजाना माना जाता है। इन सभी सामाजिक विसंगतियों को लेकर संदेश में तीखे लहजे में सवाल पूछा गया है कि आखिर ऐसा ‘कैसे’ है?
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