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संतकबीरनगर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा पॉलिसी की कथित मिस-सेलिंग के मामले में टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गई 10.45 लाख रुपये की कुल राशि 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने और 60 हजार रुपये की अतिरिक्त क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है। यह आदेश कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र स्थित अशोका हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार की शिकायत पर आया है।
डॉ. अशोक कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि 21 दिसंबर 2022 को बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें ‘स्मार्ट संपूर्ण रक्षा प्लान’ को सिंगल प्रीमियम योजना के रूप में पेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पॉलिसी के प्रस्ताव पत्र में कई त्रुटियां थीं और उस पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए थे। इसके अतिरिक्त, पॉलिसी बॉन्ड फ्री-लुक पीरियड खत्म होने के बाद प्राप्त हुआ, जिससे वे निर्धारित समय में इसे निरस्त नहीं करा सके। मजबूरन उन्हें दूसरे वर्ष का प्रीमियम भी भरना पड़ा और कुल 10.45 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा। चिकित्सक ने यह भी स्पष्ट किया कि दस्तावेजों में दर्ज एजेंट से उनकी कभी मुलाकात नहीं हुई थी।
आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह और सदस्य संतोष ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। आयोग ने बीमा कंपनी को 11 जनवरी 2024 से लेकर भुगतान की अंतिम तिथि तक 10 प्रतिशत ब्याज देने तथा 60 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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