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एडीवी इन्वेंशन एकेडमी का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहेगा और साजिशकर्ताओं द्वारा लगवाया गया सरकारी ताला जल्द खुलेगा। इसके साथ ही, उत्तराखंड की तर्ज पर 17 अतिपिछड़ी जातियों को शिल्पकार आरक्षण दिलाने का संघर्ष भी तेज कर दिया गया है। अनिल प्रजापति ने स्पष्ट किया है कि सामंतवाद और तानाशाही हुकूमत के खिलाफ शुरू किए गए इस अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटा जाएगा।
आंदोलन के दौरान तीन प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया गया है, जिनमें पीएमओ पीजी और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों के फर्जी कागजी निस्तारण, इंग्लिश मीडियम स्कूलों के नाम पर लूट-खसोट और रातोंरात लागू हुए गरीब सवर्ण आरक्षण से अतिपिछड़े वर्गों में उपजे आक्रोश शामिल हैं। अनिल प्रजापति ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन और भेदभावपूर्ण बताया है।
भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अब उनकी कार्यप्रणाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरा भरोसा इलाहाबाद उच्च न्यायालय पर जताया गया है और अधिवक्ताओं के माध्यम से न्याय की उम्मीद की जा रही है। आंदोलनकारियों का संकल्प है कि वे अपना संवैधानिक हक, अधिकार और सामाजिक न्याय लेकर रहेंगे और आने वाली पीढ़ियां इस संघर्ष की गौरव गाथा को याद रखेंगी।
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