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बस्ती में जिला पंचायत कार्यालय के उद्घाटन के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और जल्दबाजी का मामला सामने आया है। समारोह के दौरान नव निर्मित कार्यालय के जिस शिलापट्ट का अनावरण किया गया, वह पूरी तरह से स्थापित नहीं था। निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण शिलापट्ट को स्थिर करने के लिए लकड़ी की फट्टियों का सहारा लिया गया था, जिसके बाद आनन-फानन में इसका अनावरण कर दिया गया। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और प्रबुद्धजनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। लोगों का तर्क है कि किसी भी सार्वजनिक भवन का उद्घाटन गरिमामयी होता है और कार्य अधूरा होने की स्थिति में कार्यक्रम को टाल दिया जाना चाहिए था। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों की गई और क्या किसी विशेष मुहूर्त या दबाव के कारण अधूरे काम का लोकार्पण करना आवश्यक था? यह घटना जिला पंचायत की कार्यशैली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, जो हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार को लेकर भी चर्चा में रहे थे, एक बार फिर इस प्रकरण के कारण विवादों में हैं। फिलहाल जिला पंचायत प्रशासन या अध्यक्ष की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस स्थिति पर कोई स्पष्टीकरण देता है या इसे महज एक तकनीकी चूक मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
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