शुरू न्यूज़
बस्ती की हर्रैया विधानसभा सीट पर भाजपा की टिकट वितरण नीति को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखे सवाल उठने लगे हैं, जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष व्याप्त है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी लगातार स्थानीय और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ‘दलबदलुओं’ या ‘धनबल’ वाले ‘ठेकेदार टाइप’ के लोगों को चुनाव मैदान में उतार रही है। उनका कहना है कि वे वर्षों से पार्टी को मजबूत करने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन टिकट वितरण के समय मौका बाहरी लोगों या आर्थिक रूप से संपन्न नेताओं को दे दिया जाता है, जिससे ‘खांटी’ कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान स्थिति यह हो गई है कि नेताओं को अब समर्पित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता महसूस नहीं होती, बल्कि ऐसे ‘ठेकेदार टाइप’ लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और नेताओं को अधिक लाभ पहुँचा सकते हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि नेता पैसे के दम पर कार्यकर्ता खरीदने की सोच रखते हैं, और इस नीति से संगठन के प्रति उनका मोहभंग हो सकता है। पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण जमीनी कार्यकर्ताओं का साथ न मिलना बताया गया है, क्योंकि जो लोग पैसे के दम पर पार्टी में आते हैं, वे चुनावी प्रबंधन के लिए तो सक्षम हो सकते हैं, लेकिन वे जनता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव नहीं रख सकते।
क्षेत्र में यह चर्चा है कि ‘दलबदलुओं’ को टिकट देने का यह सिलसिला राजकिशोर सिंह के बाद से ही हर्रैया में पुराना है, जिससे स्थानीय कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस बार स्थानीय संगठन की नाराजगी को दूर करने के लिए अपनी नीति में बदलाव करेगा।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड