शुरू न्यूज़
बस्ती जिले में जिला सहकारी बैंक और इससे जुड़ी सहकारी समितियों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ बैंक के ऋण का एक बड़ा हिस्सा समितियों में फंसा हुआ है। इससे जिले की बैंकिंग व्यवस्था के दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है और खाद की उपलब्धता व करोड़ों रुपये की वसूली को लेकर अधिकारियों की उदासीन कार्यशैली ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
4 जुलाई 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, जिले की 116 समितियों पर कुल 5 करोड़ 35 लाख रुपये का भारी बकाया है। इसमें लालगंज, बानपुर और सिकंदरपुर समिति के सचिव अरुणेश पांडेय पर सबसे अधिक 21 लाख 16 हजार रुपये का बकाया बताया गया है। आरोप है कि सहायक निबंधक (एआर), सीडीसीओ और सचिव जैसे अधिकारी शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फील्ड में जाकर किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय एसी कमरों तक ही सीमित हैं। इन पर यह भी आरोप है कि वे खाद को समितियों तक पहुंचाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन खाद वास्तव में किसानों तक पहुंच रही है या नहीं, इसकी निगरानी में भारी लापरवाही बरतते हैं। यदि समितियों के पास न तो खाद है और न ही पैसा, तो इसे सीधे तौर पर गबन का मामला माना गया है, फिर भी अब तक किसी भी सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। साथ ही, बैंक के नुकसान के बावजूद आरटीजीएस के माध्यम से लेनदेन जारी है, जिसकी जांच की सख्त आवश्यकता जताई गई है।
इस गंभीर स्थिति के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग की गई है, जिसमें अधिकारियों को एसी कमरों से बाहर निकलकर समितियों का औचक निरीक्षण करना, खाद और पैसा दोनों गायब होने पर संबंधित सचिवों पर गबन का मुकदमा दर्ज करना, और सीडीसीओ व एआर को मिलकर जिम्मेदारी उठाने को कहा गया है ताकि खाद किसानों तक पहुंचे और बैंक का पैसा सुरक्षित वापस आ सके। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं लाते, तो जिला सहकारी बैंक की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है, जिसका सीधा खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ेगा।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड