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बस्ती जिले के विकासखंड गौर की ग्राम पंचायत इटहिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अपने मूल उद्देश्य, ग्रामीण सशक्तिकरण और श्रमिकों को रोजगार देने से भटककर भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई है। हैरानी की बात यह है कि जिन तालाबों और पोखरों में लबालब पानी भरा है, वहाँ भी मनरेगा के तहत ‘कागजी खुदाई’ का काम चल रहा है। उदाहरण के तौर पर, चौनपुर में पोखरा खुदाई के नाम पर 37 मजदूरों का ऑनलाइन मास्टर रोल जारी किया गया, जबकि मौके पर न तो कोई काम हुआ और न ही कोई मजदूर मौजूद था।
यह फर्जीवाड़ा सिर्फ हाजिरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक तालाब की खुदाई जेसीबी मशीन से कराने का भी गंभीर आरोप है, जो मनरेगा के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है क्योंकि इस योजना में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। इस पूरे खेल में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि तकनीकी सहायक दिनेश यादव न केवल इस मामले की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि इस फर्जीवाड़े को संरक्षण भी दे रहे हैं। जब मीडिया ने इस संबंध में सवाल किए, तो संतोषजनक जवाब देने के बजाय भ्रामक जानकारी दी गई, जिसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश माना जा रहा है।
यह ‘कागजी खुदाई’ का घोटाला अब सबके सामने है, जिसके चलते सरकारी खजाने पर डाका डाला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या उन जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने सरकारी धन को अपनी निजी जेब समझ लिया है और क्या मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजना को ऐसे ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने दिया जाएगा? जनता की नजरें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि दोषियों पर कब तक लगाम कसी जाती है या फिर यह फाइल भी किसी दराज में दफन हो जाएगी।
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