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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में अमहट घाट पर बना आधुनिक अंत्येष्टि स्थल सरकारी धन की बर्बादी का एक शर्मनाक उदाहरण बन गया है, जहाँ ₹4 करोड़ की लागत से बनी यह परियोजना सात साल बाद भी पूरी तरह निष्क्रिय है। 2019 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा बड़े तामझाम से उद्घाटन किया गया यह स्थल, आज तक एक भी अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है।
योजना बनाने वालों ने शायद स्थानीय परंपराओं का ध्यान नहीं रखा, जिसके चलते आज भी शहर के लोग अंत्येष्टि के लिए अमहट के पुराने मड़घाट को ही प्राथमिकता देते हैं। परिणामस्वरूप, यह करोड़ों की संपत्ति खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जहाँ इंटरलॉकिंग धंस गई है, दीवारें टूट रही हैं, और झाड़ियों ने इसे वीरान कर दिया है। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि यह स्थल अब अवैध गतिविधियों का केंद्र बन गया है। खबर है कि इस सरकारी परिसर की आड़ में धड़ल्ले से अवैध अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानें चलाई जा रही हैं, जिससे मोक्ष की जगह यह स्थान अब शराब के कारोबार का गढ़ बन गया है।
नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने इस स्थिति पर कहा है कि अब इस स्थल को ‘पार्क’ बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। हालाँकि, यह प्रस्ताव विकास की दूरदर्शिता के बजाय, पिछली गलतियों को छिपाने की कोशिश अधिक प्रतीत होता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सरकारी योजनाएँ जनता की जरूरतों और परंपराओं के अनुकूल होनी चाहिए, अन्यथा यह जनता के पैसे का अपमान और शहर के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
अमहट घाट का यह ‘आधुनिक’ कचराघर प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सवाल यह है कि क्या इस करोड़ों की बर्बादी और यहाँ चल रहे अवैध शराब के कारोबार पर कोई कार्रवाई होगी, या बस्ती की जनता को सरकारी विफलता के इन खंडहरों को यूँ ही देखते रहना होगा? समय आ गया है कि इसकी जवाबदेही तय की जाए, अन्यथा जनता के भरोसे का आखिरी टुकड़ा भी नष्ट हो जाएगा।
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