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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश के बावजूद, शिक्षा क्षेत्र में मनमानी लूट-खसोट मचाने वाले विरोधी खुले तौर पर यह ऐलान कर रहे हैं कि “किसी भी कीमत पर ADV इन्वेंशन एकेडमी चलने नहीं पाएगी”। माननीय न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने 03 जुलाई 2026 को WRIT – C No. 24587 / 2026 (Adv Invention Academy Vs State Of U.P. And 3 Others) मामले में सभी गुनहगार अधिकारियों और साजिशकर्ताओं को सप्लीमेंट्री एफिडेविट के माध्यम से पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।
आरोप है कि शिक्षा विभाग का आलाकमान और जिला प्रशासन भ्रष्टाचार में इतना लिप्त हो चुका है कि उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश की कोई परवाह नहीं, न ही भारतीय संविधान का कोई डर। एक ओर जहाँ कोर्ट सभी दोषियों को कटघरे में बुला रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता संरक्षण प्राप्त जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और माफियाओं का एक गठजोड़ ऐसा माहौल बना रहा है जैसे वे शासन, प्रशासन, सरकार, विपक्ष और न्यायपालिका पर भी भारी हैं। संतकबीरनगर के पुतसर स्थित ADV इन्वेंशन एकेडमी का अवैध सीलिंग और मान्यता आवेदन का अस्वीकरण इसी गठजोड़ का सीधा प्रमाण है।
यह स्थिति जनता से सवाल उठाती है कि क्या कानून से ऊपर कोई है, और क्या संविधान से बड़ा कोई गठजोड़ है? इन सवालों के जवाब में, विश्वास व्यक्त किया गया है कि नहीं, ऐसा नहीं है। 20 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई या उससे पहले किसी अर्जेंसी के माध्यम से न्यायालय में सच्चाई सामने आएगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। तब तक बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जारी रहेगी।
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