₹10
रिपोर्टर पंजीकरण →
logo

पुतसर के विद्रोह से 2027 में सत्ता परिवर्तन तय: अनिल प्रजापति

अनिल कुमार प्रजापति

अनिल कुमार प्रजापति ने दावा किया है कि ग्राम पुतसर का विद्रोह 2027 में सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा। वहीं, एनबीटी की एक खबर के हवाले से ओमप्रकाश राजभर के बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव से उनके रिश्ते आज भी पहले जैसे हैं और यदि वे कहेंगे तो वे 2027 में उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।

इस पर टिप्पणी करते हुए, लेखक का मानना है कि ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद और धर्मवीर प्रजापति जैसे अतिपिछड़े समाज के उन सभी नेताओं की राजनीति का अंत निश्चित है, जो भाजपा के साथ जुड़कर वोट का ध्रुवीकरण कर सत्ता का लाभ उठा रहे हैं; इसके संकेत बिहार चुनाव 2025 में मिल चुके हैं। लेखक के अनुसार, भाजपा की रणनीति स्पष्ट है कि वह जातिगत नेताओं को ‘यूज एंड थ्रो’ करे और वंचित, अतिपिछड़े, उपेक्षित, भूमिहीन व मजदूर वर्ग को सीधे अपनी पार्टी से जोड़े। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2027 से पहले इस बड़ी आबादी को लुभाने के लिए जातिगत जनगणना या 17 अतिपिछड़ी जातियों के आरक्षण जैसे बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। उस समय आरक्षण के नाम पर प्रमुखता में आए अवसरवादी नेताओं, उनके समर्थकों और निजी स्वार्थों के लिए समाज को गुटों में बांटने वाले ‘टोपी गैंग’ को ‘अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान’ का वास्तविक अर्थ समझ में आएगा।

इंडिया गठबंधन को भी चेतावनी दी गई है कि यदि वे यह मानकर चलते हैं कि लोकसभा 2024 की तरह भाजपा से नाराज़ वोट अपने आप उनके पाले में आ जाएगा, तो यह उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी होगी। यह कहा गया है कि सिर्फ ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का वोट लेने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ‘संख्यात्मक हिस्सेदारी’ भी देनी होगी। संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के ग्राम पुतसर में महंगी शिक्षा, मनमानी लूट खसोट, अन्याय, अत्याचार और सामंतवाद के खिलाफ तैयारी कर रहे बच्चों द्वारा उपजा विद्रोह ही 2027 में सत्ता परिवर्तन का आधार बनेगा, क्योंकि निचले तबके को यह स्पष्ट रूप से समझ आने लगा है कि भाजपा केवल धनवान और प्रभावशाली लोगों की हितैषी है और वह गरीब तथा कमजोरों की आँखों में धूल झोंक रही है।

लेखक ने जोर देकर कहा है कि यदि सत्ता के निर्णायक मतदाता अतिपिछड़े वंचितों को अब ‘संख्यात्मक हिस्सेदारी’ नहीं मिली, तो एक ‘तीसरा फ्रंट’ उभरकर सामने आएगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अब समाज केवल लाभ नहीं मांग रहा है, बल्कि ‘वोट बेंचवो’ (वोट बेचने वालों) को पहचानकर अपना संवैधानिक ‘हक’ मांग रहा है। अंत में, अतिपिछड़े समाज से अपील की गई है कि नेता और पार्टियाँ बदलती रहेंगी, लेकिन वे अपने हक-अधिकार, अपनी शिक्षा और अपने आरक्षण को बदलने न दें।



location

Choose your state

अपना राज्य चुनें

1
2
3
Choose your State for regional news
क्षेत्रीय समाचारों के लिए अपना राज्य चुनें

ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

ANDHRA PRADESH

ARUNACHAL PRADESH

ASSAM

BIHAR

बिहार

CHANDIGARH

CHHATTISGARH

छत्तीसगढ़

DELHI

दिल्ली

GOA

GUJARAT

HARYANA

हरियाणा

HIMACHAL PRADESH

हिमाचल प्रदेश

JAMMU AND KASHMIR

JHARKHAND

झारखंड

KARNATAKA

KERALA

LADAKH

LAKSHADWEEP

MADHYA PRADESH

मध्य प्रदेश

MAHARASHTRA

MANIPUR

MEGHALAYA

MIZORAM

NAGALAND

ODISHA

PUDUCHERRY

PUNJAB

RAJASTHAN

राजस्थान

SIKKIM

TAMIL NADU

TELANGANA

THE DADRA AND NAGAR HAVELI AND DAMAN AND DIU

TRIPURA

UTTAR PRADESH

उत्तर प्रदेश

UTTARAKHAND

उत्तराखंड

WEST BENGAL

आगे बढ़ने का मतलब ये है कि आप शूरा ऐप की नियम व शर्तों और प्राइवेसी नीतियों से सहमत हैं।
नियम और शर्तें & प्राइवेसी पॉलिसी