तुरैहा समाज ने शहीद अकलू तुरैहा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया नमन
शहीद अकलू तुरैहा समाज के लिए एक प्रेरणा श्रोत – सतीश प्रधान
मेंहदावल, संतकबीरनगर।
शुक्रवार को तुरैहा समाज के लोगों ने समाज के वीर सपूत अकलू तुरैहा का शहादत को नमन करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान तुरैहा संमाज के अनेको लोगों ने शहीद अकलू तुरैहा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस कार्यक्रम में सतीश प्रधान ने कहा कि 1947 से पहले हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था। देश में सभी नियम कानून अंग्रेज अपने हिसाब से चला रहें थे। अंग्रेजों के अमानवीय वर्वरता के कारण देश के लाखों स्वतंत्रता सेनानियों नें देश के कोने कोने में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज़ उठायी उसी क्रम अगस्त 1942 में ‘ क्रांति’ की आग पूरे देश में फैली, तो बिहार के मधुबनी में भी क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन का कड़ा विरोध शुरू किया। इसी आजादी के आंदोलन के चल रहा तभी थाने पर तिरंगा फहराने का प्रयास: 14 अगस्त 1942 को क्रांतिकारियों के एक विशाल जुलूस का नेतृत्व करते हुए अकलू तुरैहा और उनके साथी ब्रिटिश थाने/डाकघर की तरफ बढ़े, जहाँ उनका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देकर वहां तिरंगा फहराना था। अंग्रेजों की बर्बरता: ब्रिटिश पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और जब आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।अमर शहादत: इस गोलीबारी में मां भारती की रक्षा करते हुए और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए अकलू तुरैहा लड़ते लड़ते शहीद हो गए। जिसको लेकर समाज मे शहादत दिवस के रूप मनाने की परंपरा रही है।
इस दौरान सतीश प्रधान, रामचन्दर, मिथलेश कुमार, गोविंद प्रसाद, भोला, शेषनाथ बजरंगी, परसुराम, भरथरी, पवन, प्रधुम्न, संतराम शाह आदि समाज के लोग उपस्थित रहे।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड