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उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस, क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को ठगने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। हनुमंत विहार थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने ‘विन मेकर’ और ‘धनवंतरी आयुर्वेदा’ के नाम पर पिरामिड चेन (पोंजी स्कीम) चलाने वाले छह जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इस शातिर गिरोह ने उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों के करीब 60 हजार बेरोजगार युवाओं को घर बैठे हर महीने 20 से 25 हजार रुपये कमाने का झांसा देकर लगभग 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी की है।
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित था। ये बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाते थे और जॉइनिंग के नाम पर प्रति व्यक्ति 15,000 से 30,000 रुपये तक की अवैध वसूली करते थे। वसूली गई रकम के बदले युवाओं को एक घटिया और मामूली आयुर्वेदिक किट थमा दी जाती थी और फिर उन्हें दूसरों को फंसाने के धंधे में धकेल दिया जाता था। इस रैकेट को चलाने के लिए विभिन्न राज्यों में 100 से अधिक अवैध और गुप्त ट्रेनिंग सेंटर संचालित किए जा रहे थे, जहां युवाओं को ‘गुरिल्ला मार्केटिंग’ के जरिए दूसरों को जाल में फंसाने का प्रशिक्षण दिया जाता था।
यह मामला बेरोजगार युवाओं के सपनों और उम्मीदों पर सीधा वार करने वाला एक खौफनाक संगठित अपराध है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं कि आखिर 100 से अधिक गुप्त ट्रेनिंग सेंटर अधिकारियों की नाक के नीचे कैसे चलते रहे। पुलिस की यह कार्रवाई बेहद सराहनीय है, लेकिन पूर्ण न्याय तभी संभव होगा जब ठगे गए लोगों की एक-एक पाई बरामद की जाए और इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड को सख्त सबक सिखाया जाए। इसके साथ ही, यह घटना उन युवाओं के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो बिना किसी स्किल के रातों-रात अमीर बनने वाले पिरामिड सिस्टम के झांसे में आ जाते हैं।
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