शुरू न्यूज़
उत्तर प्रदेश के बस्ती में महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में मानवीय संवेदनहीनता की एक भयावह तस्वीर सामने आई है, जहाँ फ्रैक्चर और मानसिक बीमारी से जूझ रही एक लावारिस महिला को इलाज देने के बजाय 18 घंटे तक तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। जिला अस्पताल से रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुँची इस लावारिस महिला को चिकित्सकों और स्टाफ ने वार्ड में शिफ्ट करना भी मुनासिब नहीं समझा और वह अस्पताल के गलियारे में एक स्ट्रेचर पर पड़ी रही, जिस पर मक्खियाँ भिनभिना रही थीं।
इस अमानवीय घटना के दौरान अस्पताल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बिना किसी जाँच के उसे ‘कार्डियक अरेस्ट’ की समस्या बताकर टालमटोल करने का शर्मनाक प्रयास किया। हद तो तब हो गई जब उसे अस्पताल में भर्ती करने के बजाय एम्बुलेंस कर्मियों पर दबाव बनाकर कहीं और भेजने की कोशिश की गई, जिसके कारण इस बीमार महिला को पहले चिलचिलाती धूप और फिर तेज बारिश में भीगने के लिए मजबूर होना पड़ा। आखिरकार, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद इस लावारिस महिला को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया।
इस मामले में मेडिकल कॉलेज के उप-प्राचार्य ने लापरवाही को गंभीर माना है और दोषी स्टाफ से जवाब-तलब किया है। हालांकि, कागजी दावों के पीछे छिपी इस अमानवीय त्रासदी ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता पर गहरा दाग लगा दिया है और यह बड़ा सवाल उठाया है कि क्या लावारिस मरीजों के लिए अस्पतालों की आत्मा पूरी तरह मर चुकी है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड