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बस्ती जनपद के प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार का एक बेहद वीभत्स चेहरा सामने आया है, जहाँ शिकायतों के अंबार के बाद भी जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। भारतीय किसान यूनियन (भदौरिया गुट) और स्थानीय पत्रकारों ने स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ. एके चौधरी पर भ्रष्टाचार का संगठित तंत्र चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि डिप्टी सीएमओ अपने आवास पर अवैध वसूली करवाते हैं और गरिमा चौधरी नामक सहयोगी के जरिए ‘फार्म-एफ’ के नाम पर खुलेआम पैसे ऐंठते हैं। इसके अलावा, उन पर पैसे लेकर झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षण देने और सिटी अल्ट्रासाउंड व भारत अल्ट्रासाउंड जैसे केंद्रों पर कार्रवाई न करने का भी आरोप है, जहाँ कथित रूप से मृत बच्चों को भी नॉर्मल रिपोर्ट दे दी गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके खिलाफ 12 बिंदुओं पर जांच की मांग लंबित है और यदि उनके कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) की निष्पक्ष जांच हो, तो भ्रष्टाचार की कई परतें खुल सकती हैं।
भ्रष्टाचार का यह नासूर केवल स्वास्थ्य विभाग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र तक पैर पसार चुका है। कुदरहा पिपरपाती गायघाट समिति के सचिव राजकुमार पाल पर किसानों से यूरिया और डीएपी खाद की ओवर-रेटिंग करने का आरोप है। सचिव ₹266.50 की यूरिया के लिए ₹300 से ₹320 और ₹1350 की डीएपी के लिए ₹1400 की मांग करते हैं और अवैध वसूली छुपाने के लिए केवल नकद भुगतान का दबाव बनाते हैं। किसान नेता उमेश गोस्वामी का आरोप है कि इस धांधली की जांच करने आए अपर जिला सहकारी अधिकारी भी आरोपी सचिव से मिलकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं। आरोपी सचिव का खुलेआम यह कहना है कि उसके मौसा योगीजी के साथ रहते हैं, इसलिए उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पत्रकार राहुल सिंह और भाकियू (भदौरिया गुट) के मंडल अध्यक्ष उमेश गोस्वामी द्वारा इस संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अब जनता दोषियों पर सख्त कार्रवाई और जेल की सलाखें चाहती है।
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