जयराम पट्टी में निकाला भ्रष्टाचार का जिन्न, कागजों में 153 मजदूर, मौके पर सन्नाटा*
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-चक नाली खुदाई-सफाई कार्य के नाम पर केवल कागजी कार्यवाही, सरकारी धन की बंदरबांट की तैयारी
जबकी चक नाली पुरा क्षेत्र जल मग्न , घास से पटा बदहाल,जमीनी स्थिति ने खोली पोल
-प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की आपसी मिलीभगत में फर्जी हाजिरी
-बीडीओ की निगरानी व निरीक्षण केवल फाइलों में सिमटा, जमीनी हकीकत बदहाल
धनघटा संतकबीर नगर – सरकार भले ही ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों हेतु लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध करा रही है, किंतु जमीनी स्तर पर नाथ नगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जय राम पट्टी में चक नाली खुदाई एवं सफाई कार्य के नाम पर वीबी जी राम जी में फर्जी हाजिरी और कागजी कार्यवाही के जरिए भ्रष्टाचार का सिलसिला लगातार जारी है।जिससे वीबी जी राम जी योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जा रहा है और सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
प्राप्त समाचार के अनुसार -ग्राम पंचायत जयराम पट्टी में चक नाली खुदाई कार्य के नाम पर प्रसाशक /प्रधान एवं सचिव सरकारी धन को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रसाशक /प्रधान एवं द्वारा वीबी जी राम जी एक्ट की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के लिए आने वाले सरकारी धन को अपना माल समझकर सरकारी खजाना खाली करने का खेल लगातार जारी है। ग्राम पंचायत जयराम पट्टी में धरपू के खेत से संदीप के खेत तक चकनाली सफाई एवं खुदाई और जयराम पट्टी में रंजीत के खेत से पप्पू के खेत तक चक नाली सफाई एवं खुदाई संचालि कार्य में वीबी जी राम जी की उपस्थिति पंजिका एवं ऑनलाइन मस्टररोल में केवल 153 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की जा रही है, जबकि धरातल पर एक भी VB G RAM G मजदूर कार्य करता नहीं मिल रहे है। भुगतान निकालने हेतु केवल कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है। स्थल की बदहाल स्थिति स्वयं पूरी सच्चाई बयां कर रही है। जिस दो साइड़ो चक नाली खुदाई और सफाई कार्य में 153 मजदूरों से काम कराने का दावा किया जा रहा है, चक नाली पूरी तरह जल मग्न है, और मौके की स्थिति जस की तस बनी हुयी है। यदि वास्तव में 153 मजदूरों से कार्य कराया गया होता, तो स्थल की वर्तमान स्थिति और तस्वीरें इस तरह नहीं होतीं। लेकिन प्रसाशक /ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, सचिव एवं जेई (तकनीकी सहायक) भी पूरे प्रकरण में बहती गंगा में डुबकी लगाते रहे। सरकारी अभिलेखों में कार्य को गति से संचालित है जबकि मौके पर हालात जस की तस बनीं हैं। ब्लॉक प्रशासन के जिम्मेदार बीडीओ की निगरानी यदि समय-समय पर सत्यापन और निरीक्षण किया गया होता तो शायद कागजों और धरातल के बीच इतना बड़ा अंतर सामने नहीं आता। हैरान करने वाली बात यह है कि जब ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक निगरानी की पूरी व्यवस्था मौजूद है, तब इतना बड़ा अंतर आखिर कैसे बना रहता है। ऐसे में जिम्मेदार बीडीओ की खामोशी भी विभिन्न सवालों को जन्म दे रही है। आखिर इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े पर अब तक कार्यवाही नहीं हो सकी वही जिम्मेदारो की निरीक्षण केवल कागजी औपचारिकता पूरी करते हुए धरातल की सच्चाई को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।पूरे प्रकरण की यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो विकास कार्यों के चमकदार दावों और सरकारी फाइलों के पीछे छिपी तमाम हकीकतें अपने आप उजागर हो जाएंगी। इस प्रकरण के संबंध में खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ), नाथनगर फोन से जानकारी लेना चाहा लेकिन BDO ने फोन उठाना मुनासिफ नहीं समझे . इस मामले में अगर गंभीरता से जांच किया जाए तो बड़ा भ्रष्टाचार निकाल कर आएगा.
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