जातिगत गुटबाजी के वशीभूत जो लोग निचले पायदान को टुकड़े टुकड़े गैंग में बांटकर अपनी अपनी राजनिति चमकाने और टिकट आदि की होड़ में जुटे हैं उन मुर्खों को सोचना चाहिए कि जब समाज ही नहीं सुरक्षित रहेगा तो राजनीति करोगे किसपर। टिकट से पैदा सांसद विधायक मंत्री और निगम के चेयरमैन अपने साथ कुछ सगे संबंधियों का भला तो कर सकते हैं लेकिन संवैधानिक आरक्षण से एक एक बच्चा लाभान्वित होगा बेशक वह विरोधी ही क्यों न हो। अतः आरक्षण नहीं तो वोट नहीं की मुहिम से हटकर जो सत्तापक्ष का तलवा निजी स्वार्थ में चाटने को मशगूल हैं निश्चित तौर पर किसी समाजद्रोही से कम नहीं और आने वाली पीढ़ियां कभी माफ नहीं करेगी।
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