*उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी से सवाल!*
वैसे तो यूजीसी और जाति जनगणना के सहारे टीम मोदी ने बड़े ही चतुराई से समय समय पर उपयुक्त मोहरों का इस्तेमाल करके यू-टर्न की राजनीति करना चाह रही है, लेकिन सवर्ण समाज के कुछ लोगों का आरक्षण और यूजीसी के खिलाफ सड़क पर उतरा विरोध प्रदर्शन सरकार के सारे किए कराए पर पानी फेरता दिखा रहा है अन्यथा विपक्ष तो लगभग विधानसभा चुनाव 2027 के जाल में उलझ ही गया मानो।
सियासी घमासान मचता देख आज आरक्षण के पक्ष में व्यान देने वाले ये वही *केशव प्रसाद मौर्य जी* हैं, जिन्होंने *1 जनवरी 2017 को लखनऊ में प्रजापति समाज के विशाल सम्मेलन* में मंच से वादा किया था कि – *”केंद्र में हमारी सरकार है, यूपी में भी बहुमत दे दो, शिल्पकार आरक्षण के रूप में अपेक्षा से अधिक और तमाम पारितोषिक कुम्हारों को न मिले तो फिर कहना।”*
रातोंरात सवर्ण आरक्षण लागू करने के बाद आज 9 साल बाद आप कह रहे हैं – *”आरक्षण जैसे दिया जा रहा था वैसे ही दिया जाएगा”*
तो वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों का सवाल है उपमुख्यमंत्री महोदय – शिल्पकार आरक्षण जो 2017 में आपका चुनावी वादा था, वो आज *”जैसे था वैसे ही”* कैसे हो गया ?
आप विपक्ष के खिलाफ बयानबाजी के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, यह पूरा प्रदेश और देश देख रहा है। अतिपिछड़ा समाज अब बयान नहीं, *शासनादेश* चाहता है।
निर्धारित एजेंडे के तहत हमें उलझाना बंद कीजिए, शिल्पकार की मान्यता प्राप्त 26 उपजातियों समेत 17 अतिपिछड़ी जातियों का हक दीजिए।
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