शुरू न्यूज़
उत्तर प्रदेश में ‘सुशासन’ की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार प्रजापति ने लखनऊ की सड़कों पर हुए एक घटनाक्रम पर आक्रोश व्यक्त किया है, जहाँ UP पुलिस ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में कार्यरत महिलाओं को सरेआम घसीटा है। प्रजापति ने इसे ‘UP पुलिस का तांडव’ करार देते हुए पूछा है कि यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की बेटियाँ भी पुलिस से सुरक्षित नहीं हैं, तो संतकबीरनगर के ग्राम पुतसर थाना महुली की शिल्पकार समाज की बेटी अर्चना प्रजापति जैसे लोग न्याय की उम्मीद किससे करेंगे।
प्रजापति ने जनसुनवाई पोर्टल, PMO-PG पोर्टल और CM हेल्पलाइन 1076 जैसे शिकायत निवारण तंत्रों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं, आरोप लगाया है कि जनसुनवाई पोर्टल पर ‘फाइल बंद’ करके 13वीं बार नंबर-1 होने का ढोल पीटा जा रहा है, जबकि शिकायतें ‘रद्दी की टोकरी’ में जा रही हैं। उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ‘पोस्टमार्टम’ करते हुए कई गंभीर मुद्दे गिनाए: IGRS रैंकिंग को न्याय के बजाय ‘फाइल बंद’ करने का खेल बताया, 150 बच्चों के स्कूल को सील करने को Article 21A का ‘कत्ल’ कहा, और आरोप लगाया कि संतकबीरनगर FIR 328/2025 थाना महुली के UPSC छात्रों पर हुए हमले की चार्जशीट से आरोपियों के नाम ‘गायब’ कर दिए गए हैं। अब CM हेल्पलाइन की महिलाओं को सड़क पर घसीटने की घटना ने इन चिंताओं को और गहरा दिया है।
अनिल प्रजापति ने मुख्यमंत्री से सीधा जवाब माँगा है कि जब उनका ‘अपना शिकायत निवारण सिस्टम’ ही पुलिस की लाठियों से पिट रहा है, तो आम जनता की क्या ‘औकात’ है, और यह ‘बेटी बचाओ’ अभियान है या ‘बेटी घसीटो’ अभियान। उन्होंने IGRS में नंबर-1 के ‘तमगे’ को ‘जनता की लाशों पर’ लिया गया बताया है। इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र, उन्होंने तत्काल चार प्रमुख माँगें रखी हैं: CM हेल्पलाइन की पीड़ित महिलाओं पर IPC 166A और 354 के तहत FIR दर्ज कर दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए; FIR 328/2025 थाना महुली की जाँच CBI/विजिलेंस से कराई जाए और पीड़ित परिवार को Y-सुरक्षा मिले; जनसुनवाई पोर्टल, PMO-PG और CM हेल्पलाइन 1076 का सोशल ऑडिट हो; और IGRS रैंकिंग फॉर्मूला बदलकर ‘शिकायतकर्ता संतुष्टि’ को 100% और ‘फाइल बंद’ को 0% वेटेज दिया जाए। प्रजापति ने स्पष्ट किया है कि वे ‘सत्ता के खिलाफ नहीं, सिस्टम के सड़ने के खिलाफ’ हैं, और जब CM हेल्पलाइन जैसी संस्था ‘असहाय’ हो तो चुप रहना ‘राष्ट्रद्रोह’ के समान है, क्योंकि ‘होशकाल में इतना बड़ा धोखा’ पहले कभी नहीं देखा गया।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड