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संत कबीर नगर जनपद के धनघटा के उप जिलाधिकारी रविकांत चौबे ने एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवती को अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुँचाकर संवेदनशीलता और मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की है। यह घटना गुरुवार को हुई, जब खलीलाबाद तामेश्वर नाथ क्षेत्र की निवासी अंजलि पासवान एक निजी अस्पताल से स्कूटी से घर लौट रही थीं। पायलपार से आगे खुदउआ नाला के पास धनघटा की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने उनकी स्कूटी में जोरदार टक्कर मार दी, जिससे अंजलि कई फीट दूर सड़क पर जा गिरीं और गंभीर रूप से घायल होकर दर्द से तड़पने लगीं। हादसे के बाद स्कॉर्पियो चालक मौके से फरार हो गया।
दुर्घटना के बाद सड़क पर भारी भीड़ तो जुटी, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए और घायल युवती दर्द से कराहती रही। इसी दौरान, जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालय धनघटा लौट रहे उप जिलाधिकारी रविकांत चौबे की नजर सड़क पर पड़ी उस बेबस युवती पर पड़ी। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की परवाह किए तत्काल अपना वाहन रुकवाया, स्वयं नीचे उतरकर घायल युवती की स्थिति देखी। समय की गंभीरता को समझते हुए, उन्होंने अंजलि को अपनी सरकारी गाड़ी में बैठाया और सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। इस दौरान उनके चेहरे पर किसी अधिकारी का नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार अभिभावक का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
अस्पताल पहुँचने पर, चिकित्साकर्मियों को पहले लगा कि एसडीएम किसी निरीक्षण पर आए हैं, लेकिन जब उन्होंने अपनी गाड़ी से घायल युवती को उतारते देखा तो पूरा स्टाफ तुरंत उपचार में जुट गया। उप जिलाधिकारी ने केवल युवती को अस्पताल पहुँचाकर ही अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी; उन्होंने स्वयं उसका पंजीकरण कराया, चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली और तब तक अस्पताल में मौजूद रहे, जब तक इलाज पूरी तरह से शुरू नहीं हो गया। उनके इस आत्मीय और मानवीय व्यवहार ने अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
आज जब लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद करने से कतराते हैं, ऐसे समय में रविकांत चौबे ने अपने आचरण से यह संदेश दिया है कि प्रशासन का सबसे सुंदर चेहरा संवेदना, करुणा और सेवा है। क्षेत्र में एसडीएम रविकांत चौबे की इस मानवीय पहल की व्यापक सराहना हो रही है, और लोगों का कहना है कि ऐसे अधिकारी न केवल प्रशासन की गरिमा बढ़ाते हैं, बल्कि जनता के मन में शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत करते हैं। यह घटना मात्र एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उस जीवंत मानवीय संवेदना की कहानी बन गई, जहाँ एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपनी संवेदनशीलता से एक घायल बेटी के लिए अभिभावक का दायित्व निभाया।
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