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संतकबीरनगर में कथित ‘सुशासन’ के मॉडल पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जहाँ एक ओर 150 गरीब बच्चों का स्कूल “बंद स्कूल” के बोर्ड तले खड़ा है, तो वहीं दूसरी ओर कुम्हार/शिल्पकार समाज के लोग SC प्रमाण-पत्र हाथ में लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। इस बीच, अधिकारी “जनसुनवाई शिकायत” की फाइल पर “फाइल बंद” की मुहर लगा रहे हैं, जिससे इस व्यवस्था को “जन-औपचारिकता” करार दिया जा रहा है। जनता पूछ रही है कि क्या बच्चों का भविष्य प्रशासनिक निर्णयों की भेंट चढ़ना चाहिए, और आदेश मौजूद होने के बावजूद कुम्हार समाज को न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है। शिकायतकर्ता को सुने बिना निस्तारण को अन्याय बताया जा रहा है, और यह भी पूछा जा रहा है कि क्या “जीरो टॉलरेंस” केवल भाषणों तक ही सीमित है।
इस मामले में BSA अमित सिंह से सीधे तौर पर जवाब माँगा गया है कि 03.06.2026 को Caveat Notice मिलने के बाद 16.06.2026 को स्कूल क्यों सील किया गया। यह आरोप भी लगाया गया है कि आरोपी व्यक्ति ही जज बनकर शिकायत का निस्तारण कर रहा है, और यह पूछा गया है कि 150 बच्चों के Article 21A (शिक्षा के अधिकार) को कुचलने का अधिकार किसने दिया। इस पूरी स्थिति को Article 14 का उल्लंघन और न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) बताया गया है, और विशेष रूप से Adv Academy को इंसाफ दिलाने की मांग की गई है।
इन मुद्दों के मद्देनजर, चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं: एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो; नियमों के उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो; प्रभावित विद्यार्थियों और समाज को शीघ्र न्याय मिले; और जनसुनवाई व्यवस्था वास्तव में जवाबदेह बने। यह चेतावनी भी दी गई है कि जनता सब देख रही है और न्याय में जितनी देर होगी, उतने ही बड़े सवाल खड़े होंगे, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग की आवाज़ सत्ता तक न पहुँचने का मुद्दा मुखर हो रहा है।
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