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गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा 30 जून 2026 को जारी एक आदेश पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसे ‘भ्रष्टाचार का सरकारी लाइसेंस’ करार दिया गया है। इस आदेश के तहत पूरे प्रदेश में स्कूलों की जांच करने को कहा गया है, लेकिन आरोप है कि संतकबीरनगर के पुतसर स्थित एडवोकेट इन्वेंशन एकेडमी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि संतकबीरनगर-बस्ती मंडल में कई मानक विहीन स्कूलों को मान्यता कैसे मिली और अधिकांश स्कूल सिर्फ कक्षा 5 की मान्यता पर हाईस्कूल-इंटर की कक्षाएं कैसे चला रहे हैं। विशेष रूप से एडवोकेट इन्वेंशन एकेडमी पुतसर को ही निशाना बनाने का कारण पूछा गया है, क्योंकि एकेडमी सस्ती व भेदभाव मुक्त शिक्षा, NCERT किताबों को लागू करने और री-एडमिशन, नकल, TC, मार्कशीट व छात्रवृत्ति जैसे शुल्क पर अंकुश लगाने की बात करती है। साथ ही, फायर NOC और बिल्डिंग सेफ्टी के नाम पर लाखों रुपये की वसूली किसकी जेब में जा रही है, इस पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
यह आदेश ‘मानक’ के नाम पर ‘गरीब स्कूलों के शोषण’ का एक तरीका बताया गया है, जहां माफियाओं के पास रिश्वत देने के पैसे हैं जबकि कमजोर संचालकों के पास नहीं। इसे ‘शिक्षा का व्यवसायीकरण’ करार दिया गया है, जिसके खिलाफ एडवोकेट इन्वेंशन एकेडमी खड़ी है। पोस्ट में कहा गया है कि पुतसर के छोटे-छोटे बच्चों द्वारा जनजागरण शुरू करने के बाद यह मामला सड़क से सदन तक पहुँच गया है, और इससे उन लोगों को डर लग रहा है जिनकी ‘लूट’ बंद होगी। चेतावनी दी गई है कि अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान द्वारा संचालित स्कूल आज बंद हुआ है, तो कल अन्य बच्चों पर भी महंगी शिक्षा का बोझ पड़ेगा, जिससे 150 बच्चों का भविष्य दांव पर है।
इस मामले में बीएसए संतकबीरनगर से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि जब उक्त आदेश पूरे प्रदेश में प्रभावी है, तो संतकबीरनगर समेत बस्ती मंडल के अन्य स्कूलों की जांच क्यों नहीं दिख रही, और एडवोकेट इन्वेंशन एकेडमी के साथ ‘दुर्भावनापूर्ण भेदभाव’ क्यों किया जा रहा है। पोस्ट के लेखक अनिल कुमार प्रजापति ने आम जनता से परिवर्तन के लिए आगे आने की अपील की है, और BSA अमित सिंह से भी जवाब मांगा है।
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