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उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को लिखे एक खुले पत्र में संतकबीरनगर के ग्राम पुतसर निवासी अनिल कुमार प्रजापति ने जिले में कथित तानाशाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं, साथ ही कहा है कि जनसुनवाई पोर्टल गरीबों का मजाक बनकर रह गया है। प्रजापति ने बार-बार शिकायतें और सोशल मीडिया के माध्यम से अवगत कराया है कि ‘आरोपी ही जांच अधिकारी’ बनकर भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और धनबली प्रभावशालियों की मिलीभगत से संविधान के बजाय तानाशाही विधान लागू किया जा रहा है। उनका दावा है कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा इस पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
उन्होंने इसके दो ‘ज्वलंत उदाहरण’ पेश किए हैं। पहला मामला ‘एडवोकेट इन्वेंशन एकेडमी, पुतसर’ से जुड़ा है, जहाँ यूपीएससी छात्र अभय कुमार प्रजापति ने इंग्लिश मीडियम के नाम पर मनमानी लूट-खसोट रोकने का संकल्प लिया था। इसमें एनसीईआरटी किताबों, री-एडमिशन फीस, नकल, टीसी/मार्कशीट पर सुविधा शुल्क, और महंगी ड्रेस-किताब-फीस पर अंकुश लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, आरोप है कि जिला प्रशासन को समर्थन देने के बजाय, शिक्षा और भू-माफियाओं की मिलीभगत से ‘पहले दिन से नोटिस, अवैध सीलिंग, मान्यता रिजेक्शन’ का खेल खेला गया। बीएसए अमित सिंह और बीईओ पर बिना सुनवाई के 150 बच्चों का स्कूल सील करने का आरोप है, जिसे ‘अनुच्छेद 21ए की हत्या’ बताया गया है।
दूसरा उदाहरण ‘कुम्हार = शिल्पकार = अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र घोटाले’ का है, जहाँ कुम्हारों को शिल्पकार श्रेणी के तहत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र पर रोक लगाने का मामला है। इसमें जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति पर ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर’ तत्कालीन डीएम संतकबीरनगर के 27.02.2025 के आदेश को रद्द करने का आरोप लगाया गया है। अनिल कुमार प्रजापति ने संलग्न पत्र का हवाला देते हुए कहा कि समाज कल्याण अधिकारी खुद मानते हैं कि ‘जनपदीय समिति सक्षम स्तर नहीं है’, फिर भी डीएम का आदेश रद्द कर दिया गया। उनके अनुसार, संवैधानिक व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र की मांग और मामले के उच्च न्यायालय तक जाने की बात स्पष्ट करने के बावजूद ‘हीलाहवाली’ की जा रही है।
प्रजापति का आरोप है कि ये दोनों मामले साबित करते हैं कि संतकबीरनगर में ‘आरोपी ही जज’ बनकर प्राकृतिक न्याय की हत्या हो रही है, अनुच्छेद 14 का उल्लंघन कर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है, और शिक्षा माफिया, भ्रष्ट अफसर तथा भू-माफिया का गठजोड़ सक्रिय है। साथ ही, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों का केवल ‘कागजी निस्तारण’ किया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से एडवोकेट एकेडमी मामले में बीएसए अमित सिंह, बीईओ और एसडीएम धनघटा की सीबीआई/विजिलेंस जांच कराकर स्कूल को तुरंत डी-सील करने और दोषियों पर आईपीसी की धाराओं 120बी, 166, 167 के तहत एफआईआर दर्ज करने की अपील की है। अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र मामले में, उन्होंने डीएम के 27.02.2025 के आदेश को बहाल कर कुम्हार/शिल्पकार को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने और फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। जनसुनवाई पोर्टल की व्यवस्था सुधारने और कागजी निस्तारण करने वाले अधिकारियों को दंडित करने की भी मांग की गई है।
अनिल कुमार प्रजापति ने चेतावनी दी है कि गरीब का जीना ‘हराम हो गया है’ और अगर न्याय नहीं मिला, तो वे 150 बच्चों के माता-पिता और पूरे समाज के साथ डीएम कार्यालय का घेराव करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ‘नीचे से उपर तक कमीशन फिक्स है, पोस्टिंग पैसा और जुगाड़ से मिलती है तो न्याय कैसे मिले’। पत्र की प्रति प्रधानमंत्री, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी भेजी गई है।
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