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भारत सरकार के महत्वाकांक्षी “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” (वीबी-जी-राम-जी) का जिला स्तरीय शुभारंभ गुरुवार को मुरैना के जनपद पंचायत जौरा की ग्राम पंचायत उरहेरा में एक जन सम्मेलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, जनप्रतिनिधिगण, ग्राम पंचायत उरहेरा की सरपंच श्रीमती सुमन जोनवार, एसडीएम जौरा श्री शुभम शर्मा, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा श्री मनीष कुमार, तहसीलदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिसके जनहितकारी परिवर्तनों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100 के स्थान पर 125 दिवस का वैधानिक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही, मजदूरी दर ₹261 प्रतिदिन से बढ़ाकर ₹300 प्रतिदिन कर दी गई है। यदि रोजगार की मांग करने के 15 दिवस के भीतर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो 16वें दिन से पात्र हितग्राही को प्रतिदिन ₹75 बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का संचालन पूरी तरह डिजिटल होगा, जिसमें जॉब कार्डधारियों को कार्यस्थल पर प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल जियो-टैगिंग आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू की गई है। योजना के अंतर्गत जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु अनुकूलन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
ग्राम पंचायत उरहेरा की सरपंच श्रीमती सुमन जोनवार ने इस योजना को ग्रामीणों के लिए गांव में ही रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने तथा पलायन की आवश्यकता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने इसे ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होने की बात कही।
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