धनघटा में वन माफियाओं के हौसले बुलंद, सरकारी भूमि के पेड़ों पर भी नजर
वन विभाग की कथित मिलीभगत पर उठे सवाल, आम-महुआ से लेकर पीपल और चिलबिल तक की कटान का आरोप
धनघटा। तहसील क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कथित अवैध कटान को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में वन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और उन्हें कार्रवाई का कोई भय नजर नहीं आ रहा है। कभी जिन हरे पेड़ों को काटना वन माफियाओं के लिए टेढ़ी खीर माना जाता था, आज उन्हीं पेड़ों की खुलेआम कटान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक आम और महुआ जैसे पेड़ों के साथ-साथ सरकारी भूमि पर खड़े पीपल, चिलबिल समेत अन्य हरे पेड़ों को भी कथित रूप से काटकर लकड़ी की सप्लाई की जा रही है। आरोप है कि कई स्थानों पर दिनदहाड़े पेड़ों की कटान होती है और लकड़ी को आसानी से दूसरे स्थानों तक पहुंचा दिया जाता है।
ग्रामीण शिवजतन, हरिंद, भोला यादव, कमला पुजारी, रमेश, जयराम, मोले प्रसाद, राम आशीष समेत तमाम लोगों का कहना है कि क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटान का सिलसिला लगातार जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वन विभाग द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो इस तरह पेड़ों की कटान का सिलसिला नहीं बढ़ता।
वन विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में लगातार हरे पेड़ काटे जा रहे हैं तो संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो रही? क्या पेड़ों की कटान बिना किसी संरक्षण के संभव है? यदि अवैध कटान की जानकारी विभाग को है तो अब तक जिम्मेदारों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की कथित ढिलाई अथवा मिलीभगत से वन माफियाओं को खुली छूट मिल रही है, जिससे उनके हौसले और बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
कार्रवाई नहीं हुई तो उजड़ जाएगा हरियाली का अस्तित्व
ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के जीवन का आधार हैं। यदि इसी तरह हरे पेड़ों की कटान जारी रही तो आने वाले समय में क्षेत्र में हरियाली का संकट और गहरा सकता है।
अब देखना यह है कि धनघटा तहसील क्षेत्र में पेड़ों की कथित अवैध कटान की शिकायतों पर वन विभाग कब गंभीरता दिखाता है और जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल वन माफियाओं के बढ़ते हौसले और विभागीय भूमिका को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा तेज है और कई सवालों के जवाब का इंतजार है।
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