जिला पंचायत के सीपी टैक्स को लेकर व्यापारियों में आक्रोश, ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने उठाए कर निर्धारण में पारदर्शिता के सवाल, अधिकारियों से नियमानुसार कार्रवाई और व्यापारियों के साथ वार्ता की मांग
संतकबीरनगर।
जिला पंचायत द्वारा व्यापारियों से वसूले जा रहे विभव एवं संपत्ति कर (सीपी टैक्स) को लेकर व्यापारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर निर्धारण एवं वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल संतकबीरनगर के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और जिम्मेदार अधिकारियों से वार्ता की मांग उठाई।
अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर धरने पर बैठे व्यापारी
व्यापार मंडल के पदाधिकारी एवं व्यापारी जब ज्ञापन देने जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे तो अपर जिला पंचायत अधिकारी के बस्ती में बैठक में शामिल होने की जानकारी मिली। व्यापारियों ने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों से ज्ञापन लेने का अनुरोध किया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के मौजूद नहीं होने की बात कहते हुए ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया गया। इससे व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया और वे कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
इस दौरान व्यापारियों ने जिला पंचायत के अधिकारियों के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई। बाद में कर्मचारियों द्वारा अपर जिला पंचायत अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष से बातचीत के बाद जिला पंचायत के अधिकारियों ने व्यापारियों का ज्ञापन स्वीकार किया। इसके पश्चात व्यापारियों ने अपनी समस्याओं के निराकरण की मांग दोहराई।
कर निर्धारण और आरसी जारी करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष श्रवण कुमार अग्रहरी ने बताया कि संगठन को जनपद के विभिन्न व्यापारियों द्वारा विभव एवं संपत्ति कर/सीपी टैक्स के संबंध में समस्याओं से अवगत कराया गया है। व्यापारियों का कहना है कि जिला पंचायत की ओर से कर निर्धारण एवं वसूली की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कई मामलों में कर निर्धारण के आधार, निर्धारित मानकों, नोटिस जारी करने तथा आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने बताया कि कुछ व्यापारियों के विरुद्ध आरसी जारी कर उसे तहसील प्रशासन को वसूली के लिए भेजे जाने से भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है। व्यापार मंडल ने मांग की कि कर निर्धारण एवं वसूली से संबंधित सभी प्रक्रियाओं की जानकारी व्यापारियों को उपलब्ध कराई जाए और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
व्यापारियों ने रखीं छह प्रमुख मांगें
प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जैन ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए कई मांगें उठाई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
1. जनपद में विभव एवं संपत्ति कर/सीपी टैक्स लगाए जाने का वैधानिक आधार तथा संबंधित शासनादेश एवं नियम उपलब्ध कराया जाए।
2. व्यापारियों का कर निर्धारण किस आधार और निर्धारित मानक के अनुसार किया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
3. जिन व्यापारियों के विरुद्ध आरसी जारी की गई है, उन्हें नोटिस, कर निर्धारण आदेश एवं आरसी जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
4. जिन मामलों में व्यापारियों को अपना पक्ष रखने अथवा आपत्ति प्रस्तुत करने का उचित अवसर नहीं मिला है, उनमें पुनः जांच एवं सुनवाई की व्यवस्था की जाए।
5. छोटे एवं सामान्य व्यापारियों पर लगाए गए अत्यधिक अथवा विवादित कर निर्धारण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
6. जिन प्रकरणों में कर निर्धारण या आरसी के विरुद्ध आपत्ति अथवा अपील लंबित है, उनमें नियमानुसार कार्रवाई पूर्ण होने तक वसूली के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए।
वार्ता के माध्यम से समाधान की अपील
व्यापार मंडल ने जिला पंचायत अधिकारियों से आग्रह किया कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यापारियों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाए। संगठन का कहना है कि संवाद एवं सहमति के आधार पर प्रकरणों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने तथा व्यापार मंडल के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए समय उपलब्ध कराने की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जैन, प्रदेश मंत्री पवन जायसवाल, जिलाध्यक्ष श्रवण कुमार अग्रहरी, जिला महामंत्री विनीत चड्ढा, जिला कोषाध्यक्ष हरिलाल गुप्ता, हरप्रीत सिंह लक्की, पेशकार अहमद सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं व्यापारी शामिल रहे।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड