अपेंडिसाइटिस को हल्के में न लें, इलाज में देरी पड़ सकती है भारी!
गोरखपुर। तीव्र अपेंडिसाइटिस को लेकर सामने आए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने समय पर चिकित्सकीय जांच की अहमियत को रेखांकित किया है। The Lancet Global Health में प्रकाशित AlliGatOr अध्ययन में 112 देशों के 1,377 अस्पतालों के 45,218 मरीजों को शामिल किया गया। अध्ययन में लक्षण शुरू होने से पहली शल्य चिकित्सा जांच तक अधिक समय लगने के साथ अपेंडिक्स के फटने की दर बढ़ती पाई गई।
अध्ययन के अनुसार, जिन मरीजों का शल्य चिकित्सा मूल्यांकन 12 घंटे से कम समय में हुआ, उनमें अपेंडिक्स फटने की दर 22.9% थी।
यह दर 12–23 घंटे में 25.8%, 24–47 घंटे में 33.6%, 48–71 घंटे में 41.7% और 72 घंटे या उससे अधिक समय में बढ़कर 48.0% हो गई।
अध्ययन का संदेश यह है कि अपेंडिसाइ टिस की देखभाल में केवल ऑपरेशन की व्यवस्था महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि लक्षण शुरू होने के बाद समय पर अस्पताल और शल्य चिकित्सा मूल्यांकन तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में समय पर रेफरल, बेहतर परिवहन और उपचार तक पहुंच की बाधाओं को कम करने की जरूरत पर जोर दिया है। अध्ययन में 24 घंटे के भीतर शल्य चिकित्सा मूल्यांकन को एक स्वास्थ्य-व्यवस्था लक्ष्य के रूप में प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से एम्स गोरखपुर के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों के जुड़े होने की जानकारी दी गई है। आपके उपलब्ध विवरण के अनुसार इसमें डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. हरिकेश यादव और डॉ. गौरव गुप्ता शामिल हैं।
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